जेन-ज़ी और छात्र आंदोलन की दिशा पर मंथन, शिक्षा-रोजगार के सवालों पर व्यापक जनआंदोलन की मांग
- Post By Admin on Aug 09 2026
मुजफ्फरपुर: देशभर में चल रहे छात्र और जेन-ज़ी आंदोलन की वर्तमान स्थिति, उसके कारणों और आगे की दिशा को लेकर मुजफ्फरपुर में प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी आयोजित की गई। विश्वविभूति पुस्तकालय, कच्ची-पक्की में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीर चर्चा हुई।
गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. अवधेश कुमार ने की, जबकि विषय प्रवेश और संचालन भारत जोड़ो अभियान के बिहार संयोजक शाहिद कमाल ने किया। कार्यक्रम का आयोजन नागरिक समाज, मुजफ्फरपुर, भारत जोड़ो अभियान और राष्ट्र सेवा दल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। शाहिद कमाल ने कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, परिणामों में देरी और बढ़ती अनिश्चितता को युवाओं के आक्रोश का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं के सवालों को गंभीरता से समझना और उनके समाधान के लिए लोकतांत्रिक दबाव बनाना समय की आवश्यकता है।
भाकपा-माले के पूर्व जिला सचिव कृष्ण मोहन ने आंदोलन में वामपंथी छात्र संगठनों, विशेषकर आइसा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करते हुए आंदोलन को संगठित रूप से आगे बढ़ाने की रूपरेखा रखी। प्रो. निजामुद्दीन रिजवी ने उच्च शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले से संचालित महाविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, जबकि नए महाविद्यालय खोलने की घोषणाएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नए संस्थान खोलने के साथ-साथ पुराने कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनू सरकार ने कहा कि आज का युवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, परिणामों में देरी, परीक्षा अनियमितता और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं में गहरी निराशा पैदा की है। जेन-ज़ी आंदोलन को केवल तात्कालिक छात्र आंदोलन के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था से जुड़े बुनियादी सवालों के रूप में देखा जाना चाहिए।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि युवाओं और शिक्षा के प्रश्न पर नागरिक समाज को सक्रिय भूमिका निभानी होगी और सरकार पर यह सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाना होगा कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। गोष्ठी में प्रो. सुमन, मुनेश्वर सिंह बौद्ध, वासुदेव दास, आनंद पटेल, संजय प्रधान, कुमार नीरज, प्रो. लालदेव पंडित, अधिवक्ता मुकेश ठाकुर, अधिवक्ता वंदना, प्रभात कुमार, रमेश कुमार, अभय कुमार और होरील राय सहित कई सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में शाहिद कमाल ने धन्यवाद ज्ञापन किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के बेहतर भविष्य के सवालों को व्यापक लोकतांत्रिक जनचर्चा और जनआंदोलन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।