भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में युवाओं की भूमिका अहम : स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती

  • Post By Admin on Oct 14 2026
भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में युवाओं की भूमिका अहम : स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती

मधुबन: राजकीय डिग्री महाविद्यालय, मधुबन (पकड़ीदयाल), पूर्वी चंपारण में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ब्रह्मचारी व्यास नन्दन शास्त्री की अध्यक्षता में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण व संवर्धन में युवाओं की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों, संस्कारों और युवा पीढ़ी की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में जयपुर, राजस्थान से पधारे स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, आचार्य कमलेश दिव्यदर्शी ने अतिथि के रूप में भाग लिया। महाविद्यालय के प्राचार्य ने दोनों अतिथियों को मंत्र-पट्टिका प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा सृष्टि की आदि ज्ञान परंपरा है, जिसके प्रदाता स्वयं परमेश्वर हैं। यह परंपरा मनुष्य को वास्तविक अर्थों में मानव बनाती है। वेद इस ज्ञान परंपरा के मूल आधार हैं और वैदिक ऋषियों ने इसे अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और वकील जैसे पेशेवर तैयार करती है, लेकिन क्षमा, दया, तप, त्याग और मानवता जैसे गुणों का विकास भी उतना ही आवश्यक है। इन मानवीय मूल्यों के अभाव में शिक्षा अधूरी रह जाती है। भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति को संस्कार और चरित्र से जोड़कर उसके जीवन को श्रेष्ठ बनाती है। उन्होंने युवाओं से इस परंपरा को अपनाने और अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया। अतिथि आचार्य कमलेश दिव्यदर्शी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा शाश्वत सत्य का प्रचार-प्रसार करती है और मानव जीवन को नैतिक दिशा प्रदान करती है। उन्होंने इस विरासत के संरक्षण तथा नई पीढ़ी तक इसके मूल्यों को पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।

अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. ब्रह्मचारी व्यास नन्दन शास्त्री ने कहा कि वेद, शास्त्र, उपनिषद, गीता और रामायण भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण आधार हैं। आज आवश्यकता है कि युवा अपनी बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयों को अपनाएं तथा ज्ञान के साथ मानवीय गुणों को भी अपने जीवन में धारण करें। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ही भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर पुनः प्रतिष्ठित किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन गणित विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संतोष कुमार साह ने किया। इस अवसर पर डॉ. रवि भारती, डॉ. राकेश कुमार राम, डॉ. उमेश मल्लिक, डॉ. विजय कुमार मिश्र, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. सुभाष कुमार, डॉ. संदीप कुमार सुमन सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।