रजतपट की विरासत से रूबरू होगा लखीसराय, सिनेयात्रा कार्यक्रम में मरणोपरांत सम्मान समारोह

  • Post By Admin on Feb 19 2026
रजतपट की विरासत से रूबरू होगा लखीसराय, सिनेयात्रा कार्यक्रम में मरणोपरांत सम्मान समारोह

लखीसराय: कला, संस्कृति और सिनेमा के संगम का साक्षी बनने जा रहा लखीसराय संग्रहालय आगामी 21 से 23 फरवरी 2026 तक तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा – रजतपट की विरासत” की मेजबानी करेगा। सिनेमा को समर्पित संस्था सिनेयात्रा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार की भाषाई पहचान से जुड़ी पहली फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, साथ ही उनके निर्माण और संघर्ष की प्रेरक कहानियाँ भी साझा की जाएँगी।

कार्यक्रम के अंतर्गत पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ाईबो, पहली मगही फिल्म भैइया तथा पहली मैथिली फिल्म ममता गावैय गीत का प्रदर्शन प्रस्तावित है। इन फिल्मों के निर्माण से जुड़े रोचक प्रसंग और ऐतिहासिक संदर्भ सिनेयात्रा के संस्थापक सचिव, फिल्मकार एवं इतिहासकार रविराज पटेल द्वारा दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किए जाएँगे। उल्लेखनीय है कि 22 फरवरी 1963 को पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ाईबो का प्रदर्शन पटना के वीणा सिनेमा में हुआ था, जो बिहार के सिनेमाई इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है।

आयोजन को सांस्कृतिक रंग प्रदान करने के लिए कला संस्कृति पदाधिकारी सह लखीसराय संग्रहालय के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष मृणाल रंजन द्वारा संगीत प्रस्तुति दी जाएगी, जिससे कार्यक्रम का वातावरण और भी जीवंत होगा। उद्घाटन समारोह के उपरांत लखीसराय के प्रतिष्ठित चिकित्सक एवं समाजसेवी स्वर्गीय डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी डॉ. राजकिशोरी सिंह को मरणोपरांत सिनेयात्रा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026 से सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान के अंतर्गत 21 हजार रुपये का चेक, स्मृति सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न एवं शॉल प्रदान किए जाएँगे। यह सम्मान उनके पुत्र डॉ. कुमार अमित, पुत्रवधू डॉ. रूपा सिंह, पुत्री डॉ. हरिप्रिया सिंह एवं दामाद डॉ. प्रभात कुमार द्वारा ग्रहण किया जाएगा। आयोजन समिति के अनुसार यह सम्मान समाजसेवा तथा सनातन परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिनेयात्रा के संस्थापक अध्यक्ष आर. एन. दास करेंगे, जबकि जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष होंगे।

आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम में बिहार के सिनेमा और सांस्कृतिक जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति संभावित है। “बिहार की सिनेयात्रा” को राज्य की समृद्ध सिनेमाई विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।