लखीसराय में मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस, टीकाकरण और परिवार नियोजन की भी हुई समीक्षा
- Post By Admin on Sep 14 2026
लखीसराय : समाहरणालय सभागार में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया, कायाकल्प, एनक्यूएएस, परिवार नियोजन और नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों की नियमित निगरानी, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, समय पर रेफरल, टीकाकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य और स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करने को लेकर आवश्यक निर्देश दिए गए।
बैठक में सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति ने मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि गर्भावस्था, प्रसव और प्रसव के बाद होने वाली प्रत्येक मातृ मृत्यु की पहचान, सूचना, समीक्षा तथा कारणों का विश्लेषण इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। इसका मकसद मृत्यु के कारणों को समझकर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है। पहले प्रति एक लाख जीवित जन्म पर मातृ मृत्यु दर 104 थी, जो अब घटकर 96 हो गई है। प्रत्येक मातृ मृत्यु की गहन समीक्षा, मृत्यु के कारणों की पहचान, समय पर रेफरल, स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार को इस उपलब्धि की प्रमुख वजह बताया गया।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक प्रखंड स्तर से मातृ मृत्यु के छह मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें चार मामलों की समीक्षा पूर्व में हो चुकी है। अगस्त में हुई दो अन्य मातृ मृत्यु की बैठक के दौरान जिला पदाधिकारी ने विस्तार से समीक्षा की और संबंधित मामलों में उपलब्ध चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली। जिला पदाधिकारी ने जिले में होने वाली प्रत्येक मातृ मृत्यु की सूचना तत्काल प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत समीक्षा करने और वास्तविक कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी आशा और आशा फैसिलिटेटर से मातृ एवं शिशु मृत्यु की दैनिक रिपोर्ट लेने को कहा। साथ ही सभी गर्भवती महिलाओं का अद्यतन विवरण तैयार करने, उनका फोटो और मोबाइल नंबर दर्ज करने तथा आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से नियमित फॉलोअप कराने का निर्देश दिया। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी नियमित निगरानी, आवश्यक जांच, चिकित्सकीय परामर्श और समय पर संस्थागत प्रसव या रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
शिशु मृत्यु की समीक्षा को लेकर भी प्रतिदिन रिपोर्ट प्राप्त करने और प्रत्येक मामले के कारणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। आशा, आशा फैसिलिटेटर, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को कमजोर, कम वजन वाले या गंभीर रूप से बीमार नवजात एवं बच्चों की समय पर पहचान करने को कहा गया। जरूरत पड़ने पर ऐसे बच्चों को तत्काल एसएनसीयू और एनआरसी में भर्ती कराने तथा उनके उपचार, पोषण और नियमित फॉलोअप पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया।
परिवार नियोजन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिला पदाधिकारी ने योग्य और इच्छुक लाभार्थियों की सूची प्रखंड एवं स्वास्थ्य संस्थान स्तर पर तैयार करने तथा लक्ष्य के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराने को कहा। लाभार्थियों को स्थायी और अस्थायी परिवार नियोजन साधनों की जानकारी देकर उनकी आवश्यकता और सहमति के अनुसार सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। जिला सामुदायिक उत्प्रेरक ने बताया कि 14 सितंबर से परिवार नियोजन पखवाड़ा शुरू किया गया है। इस दौरान समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के साथ परिवार नियोजन सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। पिछले पखवाड़े में हलसी प्रखंड के बेहतर प्रदर्शन की जिला पदाधिकारी ने सराहना की और अन्य प्रखंडों को भी निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बेहतर उपलब्धि हासिल करने का निर्देश दिया।
नियमित टीकाकरण की समीक्षा में चानन और लखीसराय सदर प्रखंड को लक्ष्य के विरुद्ध शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। जिला पदाधिकारी ने कहा कि कोई भी पात्र बच्चा या गर्भवती महिला नियमित टीकाकरण से वंचित नहीं रहनी चाहिए। ड्यू लिस्ट के आधार पर आशा और एएनएम को लाभार्थियों का फॉलोअप करने, छूटे हुए और ड्रॉपआउट बच्चों का टीकाकरण कराने तथा टीकाकरण सत्रों की नियमित निगरानी करने को कहा गया।
कायाकल्प और एनक्यूएएस कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों और अस्पताल प्रबंधकों को स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाए रखने का निर्देश दिया गया। वार्ड, ओपीडी, प्रसव कक्ष, शौचालय और अस्पताल परिसर की नियमित सफाई, संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन तथा जैव-चिकित्सीय कचरे का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया। एनक्यूएएस के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप मरीजों की सुविधा, अभिलेखों के संधारण, संक्रमण नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने तथा चिन्हित कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के अंत में जिला पदाधिकारी ने बाढ़ राहत कार्यक्रम के दौरान विषम परिस्थितियों में तत्परता और समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरिया और रेफरल अस्पताल बड़हिया की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बाढ़ और आपदा जैसी परिस्थितियों में लोगों को निर्बाध एवं त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। दोनों संस्थानों की टीम ने इस दिशा में सराहनीय कार्य किया है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों को टीम भावना के साथ कार्य करते हुए जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने तथा लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। बैठक में उप विकास आयुक्त, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस), जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला योजना समन्वयक डॉ. कुमार अमित, अस्पताल प्रबंधक समेत स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।