हरितालिका तीज और हिन्दी दिवस पर पर्यावरण भारती ने किया पौधारोपण, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
- Post By Admin on Sep 14 2026
लखीसराय : अभयपुर क्षेत्र की लोसघानी पंचायत के शिवनगर में सोमवार को हरितालिका तीज व्रत और हिन्दी दिवस के अवसर पर पर्यावरण भारती की ओर से पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान फलदार वृक्ष नारियल के दो और जामुन के एक पौधे लगाए गए। कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरणविद नवीन निराला ने किया।
पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक एवं अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर के आसपास कम से कम 10 पौधे लगाने चाहिए। इन पौधों की कम से कम पांच वर्षों तक देखभाल और सुरक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। लापरवाही जारी रही तो नेपाल जैसी प्राकृतिक त्रासदियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण हिमनद तेजी से पिघल रहे हैं। इसका असर प्राकृतिक संतुलन पर पड़ रहा है और बाढ़ सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में पौधारोपण के साथ लगाए गए पौधों की नियमित सुरक्षा भी जरूरी है।
कार्यक्रम में हरितालिका तीज व्रत के धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि 14 सितंबर 2026, सोमवार को तीज व्रत के पूजन के लिए सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक मुहूर्त निर्धारित था। सुबह की पूजा नहीं कर पाने की स्थिति में शाम 6:24 बजे से रात 8:48 बजे तक पूजन का समय बताया गया। हरितालिका तीज पर महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना को लेकर निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की मिट्टी या बालू से प्रतिमा बनाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। अगले दिन 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 5:54 बजे व्रत पूर्ण होगा। राम बिलास शाण्डिल्य ने कहा कि हरितालिका तीज को प्रकृति वंदन और पूजन से जोड़कर भी देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए मानव को प्रकृति के करीब लौटना होगा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभानी होगी।
पर्यावरणविद नवीन निराला ने हिन्दी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में पहली बार हिन्दी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था। इससे पहले 1949 में संविधान सभा ने 14 सितंबर को हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। स्वतंत्र भारत में प्रशासनिक कार्यों और देश को एक सूत्र में जोड़ने के लिए एक राजभाषा की आवश्यकता महसूस की गई थी। हिन्दी को देश में व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषा होने के कारण राजभाषा का दर्जा दिया गया। उन्होंने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चंद्र को हिन्दी साहित्य और गद्य का जनक माना जाता है तथा हिन्दी की लिपि देवनागरी है। हिन्दी दिवस जैसे अवसर पर पौधारोपण प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण संदेश देता है। पौधारोपण कार्यक्रम में धनवंती देवी, रेखा देवी, देवव्रत पाहन, राम बिलास शाण्डिल्य, नवीन निराला, हिमालय, भोला प्रसाद, गोपाल कुमार, अमित कुमार वर्मा और बलेन्दु शेखर सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।