मुजफ्फरपुर में जीवंत हुआ गांधी इतिहास, पदयात्रा के साथ जागरूकता का संदेश

  • Post By Admin on Apr 13 2026
मुजफ्फरपुर में जीवंत हुआ गांधी इतिहास, पदयात्रा के साथ जागरूकता का संदेश

मुजफ्फरपुर : आजादी के आंदोलन की विरासत, सद्भावना, लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों की रक्षा एवं उन्हें मजबूत करने के उद्देश्य से निकाली जा रही “जहां पड़े कदम गांधी के – एक कदम गांधी के साथ” पदयात्रा सोमवार 13 अप्रैल 2026 को अपने चौथे दिन मुजफ्फरपुर पहुंची। यात्रा पटना से चंपारण की ओर अग्रसर है और इस क्रम में लंगट सिंह कॉलेज परिसर स्थित ऐतिहासिक गांधी कूप पर सर्व धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

इतिहास के इस महत्वपूर्ण स्थल की चर्चा करते हुए बताया गया कि अप्रैल 1917 में महात्मा गांधी चंपारण जाने के क्रम में मुजफ्फरपुर पहुंचे थे और एल.एस. कॉलेज परिसर में ठहरे थे। वहीं स्थित इस कुएं का ठंडा और स्वच्छ पानी देखकर उन्होंने इसी जल से स्नान करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद यह कुआं “गांधी कूप” के नाम से प्रसिद्ध हो गया और आज भी गांधीजी की स्मृतियों को संजोए हुए है।

प्रार्थना सभा के उपरांत बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अमरेंद्र नारायण यादव ने बताया कि गांधीजी के मुजफ्फरपुर प्रवास की शताब्दी के अवसर पर उस ऐतिहासिक घटना का पुनर्निर्माण किया गया। उन्होंने कहा कि एक फिल्म में गांधीजी को सीधे पटना से चंपारण पहुंचते दिखाया गया, जिसमें मुजफ्फरपुर का उल्लेख नहीं था, इसी से प्रेरणा लेकर इस आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई। इतिहासकार भोज नंदन बाबू और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से गांधीजी के आगमन की परिस्थितियों को यथासंभव वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया गया। जैसे ही इस पुनर्निर्माण की सूचना फैली, रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा उत्तर बिहार वहां एकत्र हो गया हो। उस समय की झलक प्रस्तुत करने के लिए छह बैलगाड़ियों का उपयोग किया गया।

उन्होंने अप्रैल 1947 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि गांधीजी लंगट सिंह कॉलेज के एक कक्ष में ठहरे थे, जहां उस समय जे. बी. कृपलानी मौजूद थे। जब अंग्रेज प्राचार्य ने कृपलानी से गांधीजी को वहां ठहराने पर सवाल किया, तो उन्होंने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए कहा कि हमारे यहां अतिथि होटलों में नहीं रुकते। इसके बाद कृपलानी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आज गांधीजी को जितना समाज से अलग करने की कोशिश की जाएगी, वे उतने ही अधिक प्रासंगिक बनकर सामने आएंगे।

इसके बाद यात्रा दल पदयात्रा करते हुए माड़ीपुर स्थित माध्यमिक शिक्षक संघ सभागार पहुंचा, जहां ‘आजादी की विरासत, लोकतंत्र एवं संविधान’ विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का संचालन यात्रा आयोजक अशोक भारत ने किया, जिसमें शहर के समाजसेवियों, छात्रों और शिक्षकों की बड़ी भागीदारी रही।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, अर्थशास्त्री एवं अनुग्रह नारायण सिंह समाज अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक डी. एम. दिवाकर ने अपने संबोधन में कहा कि नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन को भारतीय समाज की पुनर्रचना के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन ये कदम देश की संघीय संरचना के लिए आघात साबित हुए। उन्होंने कहा कि इनसे आम जनता के जीवन में संकट उत्पन्न हुआ तथा छोटे कारोबारियों और उद्योगों को भारी नुकसान हुआ।

भारत की विरासत पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश की परंपरा उदारवादी रही है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। उन्होंने बुद्ध परंपरा और गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म में आलस्य और अनावश्यक संचय का कोई स्थान नहीं है, और आवश्यकता से अधिक संचय करने वाला व्यक्ति चोर के समान होता है।

उन्होंने चिंता जताई कि आज समाज में आपसी विश्वास कम होता जा रहा है और सत्ता सवालों से बचना चाहती है, जबकि गांधीजी व्यवस्था परिवर्तन की बात करते थे। उन्होंने नागरिकों से अपने कर्तव्यों को समझते हुए निडर होकर सत्ता से प्रश्न करने का आह्वान किया।

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा कि मुजफ्फरपुर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र से गांधीजी के विचारों को आगे बढ़ाने का सशक्त संदेश पूरे समाज तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि यह शहर लीची उत्पादन के लिए प्रसिद्ध होने के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी अग्रणी रहा है। विशेष रूप से क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बलिदान ने देश की आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों में हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा देश के लिए आदर्श है।

उन्होंने वर्तमान समय में गांधीजी के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि आज समाज नफरत, भय और संकीर्णता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में मानव मूल्यों और मानवीय बुद्धिमत्ता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए हो सके।

इस यात्रा में सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल, प्रबंधक ट्रस्टी शेख हुसैन, सचिव अरविंद अंजुम, उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष रामधीरज, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता चौधरी राजेंद्र, सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरिन, यात्रा संयोजक अशोक भारत एवं प्रदीप प्रियदर्शी, बिहार प्रदेश लोक समिति के शिवजी सिंह, लेखक पंकज कुमार श्रीवास्तव, हिमालय विजेता कीर्ति, सायकिल गर्ल शिवानी कुमारी, कबड्डी खिलाड़ी तनु वर्मा, वैज्ञानिक चेतना निर्माण कार्यकर्ता विकास कुमार, युवा सामाजिक कार्यकर्ता उमेश तूरी, मयूर, सौरभ सिंह, पर्यावरण कार्यकर्ता अनूप कुमार, कठपुतली कलाकार सुनील कुमार, मक़बूल अहमद, शाहिद कमाल, हेमनारायण विश्वकर्मा, प्रोफेसर संतोष सारंग, कुमार नीरज, माधुरी यादव, मुन्ना पासवान एवं विनय निषाद सहित कई अन्य लोग शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में शांति सेना के सोनू सरका ने धन्यवाद ज्ञापन किया।