आशुतोष ब्रह्मचारी पर जानलेवा हमला, नाक काटने की कोशिश का आरोप

  • Post By Admin on Mar 08 2026
आशुतोष ब्रह्मचारी पर जानलेवा हमला, नाक काटने की कोशिश का आरोप

प्रयागराज : जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी पर ट्रेन में जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि रीवा एक्सप्रेस से प्रयागराज जाते समय रविवार सुबह करीब पांच बजे कुछ लोगों ने धारदार हथियारों से उन पर हमला कर दिया और उनकी नाक काटने की कोशिश की।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने बताया कि वे शाकुंभरी पीठ से प्रयागराज जाने के लिए पहले गाड़ियों से गाजियाबाद पहुंचे थे, क्योंकि उनका टिकट गाजियाबाद से था। इसके बाद वे रीवा एक्सप्रेस से प्रयागराज के लिए रवाना हुए। इसी दौरान ट्रेन में हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने किसी तरह बाथरूम में छिपकर अपनी जान बचाई।

ब्रह्मचारी का आरोप है कि उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत नाबालिग बटुकों से जुड़े मामले में मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद कथित तौर पर यह घोषणा की गई थी कि जो व्यक्ति आशुतोष ब्रह्मचारी की नाक काटकर लाएगा, उसे 21 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इसी साजिश के तहत उनकी हत्या की कोशिश की गई।

इस मामले में उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद, अरविंद, प्रकाश और दिनेश शर्मा के खिलाफ केस दर्ज कराया है।

गौरतलब है कि 21 फरवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका पर विशेष पॉक्सो न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी थाने के प्रभारी को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत दायर किया गया था, जिसमें प्रावधान है कि यदि पुलिस शिकायत दर्ज करने से इंकार करती है तो व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन दे सकता है।

बताया जाता है कि ब्रह्मचारी ने दो नाबालिग बच्चों को पॉक्सो कोर्ट में पेश किया था। अदालत ने 13 फरवरी को इस आवेदन पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। बाद में प्रयागराज के पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार की ओर से पेश की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद अदालत ने एफआईआर दर्ज करने और मामले की आगे जांच करने का निर्देश दिया था।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि प्रयागराज में आयोजित माघ मेले से भी जुड़ी बताई जा रही है। मौनी अमावस्या स्नान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पारंपरिक पालकी यात्रा के माध्यम से संगम जाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन भारी भीड़ और नो-व्हीकल जोन का हवाला देते हुए प्रशासन ने यात्रा को रोक दिया था। इसके बाद उनके समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति भी बनी थी।