जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन की कवि गोष्ठी संपन्न, नई जिम्मेदारियों का हुआ सर्वसम्मति से चयन
- Post By Admin on Jul 26 2026
लखीसराय: जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन, लखीसराय के तत्वावधान में रविवार को स्थानीय प्रभात चौक स्थित होटल भारती के सभागार में भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अरविंद कुमार भारती ने की, जबकि संचालन उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह आजाद ने किया। गोष्ठी में जिले के कई कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सम्मेलन में साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, देश, राजनीति, ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाओं और समसामयिक मुद्दों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में हास्य, व्यंग्य, गीत, ग़ज़ल और लोकभाषा की रचनाओं ने श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी। बलजीत कुमार ने "मतलबी दुनिया है, पैसे हैं तो सबकुछ है" शीर्षक रचना के माध्यम से बदलते सामाजिक मूल्यों पर कटाक्ष किया। सुबोध कुमार ने "रुपया गिर गया रे विश्व बैंक के बाजार में" के जरिए आर्थिक परिस्थितियों को स्वर दिया। कवि मुन्द्रिका सिंह ने "मोदी जी तुझे सलाम, तूने दुनिया को दिखा दिया है भारत की शान" रचना प्रस्तुत की। वहीं राज कुमार ने खेल भावना पर आधारित "बल्ला और गेंद पकड़ कर हल्ला खूब मचबाया" का पाठ किया।
गुलशन कुमार सिंह ने प्रेम और भावनाओं पर आधारित "एक दिन मैं चला चाहतों की डगर", भोला पंडित ने लोकभाषा में "बरसेला सावनमा, हरसेला किसनवां", सुनील कुमार (वार्ड कमिश्नर) ने "इस गम की दुनिया में खुशी कहां मिलती है", राजेश्वरी प्रसाद सिंह ने "संघर्ष से जीवन मिलता है", सौरव कुमार ने "क्या कहता है दशांश", जीवन पासवान ने "आप मेरी खुशी ले लीजिए और अपना गम मुझे दे दीजिए", दशरथ महतो ने "सोने वाले जाग जाइए", उपेंद्र कुमार ने ग़ज़ल तथा देवेंद्र सिंह आजाद ने व्यंग्य रचना "कहो छप्पन इंची, सरेंडर क्या हाल है" का पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष अरविंद कुमार भारती ने अपनी रचना "अपना हृदय के साफ करहो, छोटका के गलती माफ करहो" प्रस्तुत कर आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया।गोष्ठी के दौरान सर्वसम्मति से साहित्यकार सतेन्द्र अरुण को जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन का संरक्षक तथा कवि मुन्द्रिका सिंह को कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया गया। कार्यक्रम के समापन पर राजेश्वरी प्रसाद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी कवियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।