जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और सशक्त बनाने पर मंथन, विशेषज्ञों ने रखे सुझाव

  • Post By Admin on Jun 15 2026
जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और सशक्त बनाने पर मंथन, विशेषज्ञों ने रखे सुझाव

पटना : जन्म और मृत्यु का शत-प्रतिशत पंजीकरण नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सुशासन को मजबूत बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह बात बिहार सरकार के योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। कार्यशाला का आयोजन बिहार सरकार के अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) द्वारा यूनिसेफ और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (यूएनईएससीएपी) के सहयोग से किया गया था।

मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि जिस प्रकार जनगणना और आबादी संबंधी आंकड़ों ने आवास जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर संचालन में मदद की है, उसी प्रकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण से प्राप्त सटीक आंकड़े सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक लोग पंजीकरण के महत्व और प्रक्रिया से परिचित हो सकें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण की मजबूत व्यवस्था राज्य को विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराती है, जो बेहतर नीतियों और योजनाओं के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने निजी डॉक्टरों, क्लीनिकों और अस्पतालों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि जन्म और मृत्यु की घटनाओं का तत्काल पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य में शत-प्रतिशत पंजीकरण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नियमों और व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से स्वास्थ्य संस्थानों के बाहर होने वाले जन्मों के पंजीकरण में पंचायत राज संस्थाओं की भूमिका को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

मुख्य वक्तव्य में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु का समय पर और सही पंजीकरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि विकास योजनाओं और जनहितकारी कार्यक्रमों के लिए विश्वसनीय आंकड़ों का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि आज विकास की सफलता काफी हद तक सटीक और अद्यतन आंकड़ों पर निर्भर करती है। डॉ. विजयलक्ष्मी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से नागरिक पंजीकरण व्यवस्था में लगातार सुधार हुआ है, लेकिन अब इसे और अधिक सरल, सुलभ तथा नागरिकों के अनुकूल बनाने की जरूरत है। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और एकरूप व्यवस्था पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम के अंत में अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, बिहार सरकार के निदेशक एवं मुख्य जन्म-मृत्यु निबंधक रंजीत कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।