लखीसराय में सिनेयात्रा का आगाज़, लाइफ टाइम अचीवमेंट सम्मान और मगही फ़िल्म भैया आकर्षण का केंद्र
- Post By Admin on Feb 21 2026
लखीसराय : सिनेयात्रा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय कार्यक्रम “बिहार की सिनेयात्रा : रजतपट की विरासत” का प्रथम दिवस सम्मान, स्मृति और सांस्कृतिक विरासत के भावनात्मक संगम के रूप में संपन्न हुआ। लखीसराय संग्रहालय के सभागार में आयोजित इस आयोजन में स्थानीय दर्शकों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से लोग ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े। कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया।
प्रथम सत्र में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें लखीसराय के प्रसिद्ध चिकित्सक दम्पति स्वर्गीय डॉ. श्याम सुंदर प्रसाद सिंह एवं डॉ. राजकिशोरी सिंह को उनके सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए मरणोपरांत “सिनेयात्रा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026” प्रदान किया गया। सम्मान उनके पुत्र और अशोक धाम ट्रस्ट के सचिव डॉ. कुमार अमित, पुत्रवधू डॉ. रूपा सिंह, पुत्री डॉ. हरिप्रिया तथा दामाद डॉ. प्रभात कुमार ने ग्रहण किया। लंदन से उनके सुपुत्र सुमित कुमार भी ऑनलाइन जुड़े। सम्मान स्वरूप इक्कीस हजार रुपये की नगद राशि, स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। सम्मान ग्रहण के दौरान परिवारजनों ने भावुक शब्दों में आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र, हाउस ऑफ वेराइटी के सचिव और पटना के रीजेंट सिनेमा के मालिक सुमन सिन्हा, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी सह संग्रहालय अध्यक्ष मृणाल रंजन तथा सिनेयात्रा के संस्थापक सचिव रविराज पटेल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
द्वितीय सत्र में भारत की पहली मगही फ़िल्म भैया का विशेष प्रदर्शन हुआ। शोध वक्तव्य में रविराज पटेल ने बताया कि यह बिहार की क्षेत्रीय भाषा में बनी पहली फ़िल्म थी। फ़िल्म के लेखक-निर्देशक फणी मजूमदार थे। इसमें तरुण बोस, विजया चौधरी और अचला सचदेव ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। चित्रगुप्त के संगीत और विन्द्यवासिनी देवी एवं प्रेम धवन के गीतों ने फ़िल्म को विशिष्ट पहचान दी। “सूपवे नरियरवे” जैसे छठ गीत को लता मंगेशकर, आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी और मन्ना डे ने स्वर दिया। फ़िल्म प्रदर्शन के दौरान सभागार में भावुक वातावरण देखने को मिला। दर्शकों ने अपनी मातृभाषा मगही में बनी पहली फ़िल्म को बड़े पर्दे पर देखकर आत्मीय जुड़ाव महसूस किया। आयोजन ने क्षेत्रीय सिनेमा की गौरवशाली विरासत को याद करते हुए सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर मृणाल रंजन, दीपक कुमार, डॉ. विनीता सिन्हा, डॉ. सीता देवी, डॉ. सीताराम सिंह, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंघानिया, डॉ. प्रवीण कुमार सिन्हा, डॉ. राजेंद्र सिंघानियाँ तथा प्रो. डॉ. आर.एन. दास सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।