​लखीसराय में बाढ़ का कहर : नाकाफी राहत पर भड़की भाकपा, कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

  • Post By Admin on Sep 07 2026
​लखीसराय में बाढ़ का कहर : नाकाफी राहत पर भड़की भाकपा, कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी

लखीसराय : जिले में बाढ़ के गहराते संकट के बीच राहत और बचाव कार्यों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठने लगे हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की लखीसराय जिला इकाई ने प्रशासनिक तैयारियों को पूरी तरह नाकाफी करार देते हुए आरोप लगाया है कि तंत्र आपदा को अवसर में बदलने और महज सोशल मीडिया प्रचार तक सीमित होकर रह गया है।

भाकपा नेताओं ने स्थिति बयां करते हुए कहा कि जिले के सैकड़ों गांवों का संपर्क जिला, प्रखंड और अंचल मुख्यालयों से कट चुका है। कागजों और बयानों में भारी-भरकम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर पीड़ित परिवार सुरक्षित ठिकाने, भोजन, स्वच्छ पेयजल और दवाओं के लिए दर-दर भटकने को विवश हैं। पार्टी का कहना है कि सिर्फ अधिकारियों के दौरे और फोटो खिंचवाने से पीड़ितों का पेट नहीं भरने वाला, जब तक कि निरीक्षण को वास्तविक राहत वितरण में न बदला जाए।

बाढ़ का सबसे भयावह प्रहार किसानों और मूक पशुओं पर पड़ा है। खड़ी फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो चुकी हैं, वहीं मवेशियों के सामने चारे का घोर संकट पैदा हो गया है। किसान अपने दुधारू और पालतू पशुओं को लेकर खुले आसमान के नीचे सड़कों तथा रेलवे ट्रैक के किनारे डेरा डालने को मजबूर हैं। पर्याप्त शेड और चारे के अभाव में पशुधन की हालत लगातार बिगड़ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी झटका लग रहा है।

भाकपा के जिला सचिव हर्षित यादव, जिला कार्यकारिणी सह कार्यालय मंत्री अरुण सिंह तथा जिला कार्यकारिणी सदस्य रजनीश कुमार ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी ने लखीसराय को औपचारिक रूप से बाढ़ प्रभावित जिला घोषित करने, विशेष राहत पैकेज देने, चोकर व चारे का फौरी प्रबंध करने, जलमग्न इलाकों में पर्याप्त नावें चलाने और स्वास्थ्य शिविर लगाने की पुरजोर मांग उठाई है। इसके साथ ही फसल और संपत्ति नुकसान का पारदर्शी आकलन कर पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा देने की बात कही गई है।

कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि प्रचारबाजी बंद कर जमीनी स्तर पर ठोस मदद नहीं पहुंचाई गई, तो पार्टी किसानों और आम जनता को लामबंद कर समाहरणालय का घेराव करेगी और चरणबद्ध जनांदोलन छेड़ेगी, जिसकी सारी जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी।