बिहार में जल-प्रलय: पटना से कटिहार तक खौफ का मंजर, 20 लाख लोग बेघर और बेसहारा

  • Post By Admin on Sep 07 2026
बिहार में जल-प्रलय: पटना से कटिहार तक खौफ का मंजर, 20 लाख लोग बेघर और बेसहारा

पटना : बिहार में बाढ़ की स्थिति विकराल और भयावह रूप ले चुकी है, जहां उफनती नदियों ने राज्य के एक बड़े हिस्से को जलमग्न कर लाखों जिंदगियों को संकट में धकेल दिया है। गंगा के रौद्र रूप ने राजधानी तक तबाही मचा रखी है, जहां पटना के गांधी घाट पर नदी का जलस्तर इतिहास के अपने अब तक के ‘हाईएस्ट फ्लड लेवल’ (HFL) को लांघकर नए खतरे का संकेत दे रहा है। हाथीदह में भी पानी पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करने पर आमादा है। राज्य के 11 जिलों में करीब 19.57 लाख की आबादी इस महाप्रलय के बीच अपने घरों में कैद या पलायन को मजबूर है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन को युद्धस्तर पर हाई अलर्ट घोषित कर सभी संवेदनशील तटबंधों पर 24 घंटे की आपात निगरानी बैठानी पड़ी है।

आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल के 70 प्रखंडों की सैकड़ों पंचायतें पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगले तीन दिनों तक हाथीदह और उसके डाउनस्ट्रीम इलाकों में स्थित गेज स्टेशनों पर स्थिति बेहद नाजुक बनी रह सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार के तटवर्ती क्षेत्रों में फील्ड इंजीनियरों को तटबंधों की निरंतर गश्त और बाढ़ नियंत्रण मशीनरी को तैयार रखने को कहा गया है।

राज्य के प्रमुख बैराजों पर भी जलस्तर का भारी दबाव देखा जा रहा है। बीरपुर बैराज पर कोसी नदी का डिस्चार्ज 1,73,255 क्यूसेक दर्ज किया गया है, जबकि वाल्मीकिनगर बैराज पर गंडक का डिस्चार्ज 1,29,000 क्यूसेक पर स्थिर बना हुआ है। वहीं इंद्रपुरी बैराज पर सोन नदी का डिस्चार्ज 2,27,717 क्यूसेक रहा, हालांकि इसमें अब मामूली गिरावट का रुझान है। इसके बावजूद गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले दो दिनों में राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका जताई है, जिससे जलस्तर में और इजाफा हो सकता है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। ग्राउंड जीरो पर एनडीआरएफ की 10 और एसडीआरएफ की 27 टीमें तैनात हैं, जबकि जलमग्न इलाकों से लोगों को निकालने के लिए 1,345 नावों का संचालन किया जा रहा है। विस्थापित लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने 110 सामुदायिक रसोई शुरू की हैं, जिनके जरिए अब तक करीब दो लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों के बीच 55,500 से अधिक पॉलीथीन शीट्स और 10,400 सूखे राशन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं, साथ ही चिन्हित राहत शिविरों में भोजन और दवा की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

इस भीषण त्रासदी के बीच राज्य में सियासी पारा भी चढ़ गया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से राज्य की इस स्थिति को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग की है। पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने केंद्र से 5,000 करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक पैकेज और रेस्क्यू के लिए वायु सेना के हेलीकॉप्टर मुहैया कराने की अपील की। तेजस्वी ने दावा किया कि राज्य का 76 फीसदी भूभाग और 19 जिले गंभीर बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे सार्वजनिक संपत्तियों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री से जमीनी हकीकत का मुआयना करने के लिए तुरंत बिहार दौरा करने की मांग भी रखी।