पटना में रिश्तों और इश्क के बदलते रंगों पर आधारित नाटक ने दर्शकों को बांधा

  • Post By Admin on Feb 20 2026
पटना में रिश्तों और इश्क के बदलते रंगों पर आधारित नाटक ने दर्शकों को बांधा

पटना: राजधानी के सांस्कृतिक परिदृश्य में शुक्रवार की संध्या एक महत्वपूर्ण रंगमंचीय आयोजन दर्ज हुआ। 20 फरवरी 2026 को राजेंद्र नगर स्थित प्रेमचंद रंगशाला में संध्या 6:45 बजे नाटक ख्वाहिशों की काउंटर जंप का मंचन किया गया। प्रस्तुति का निर्देशन युवा रंगकर्मी राजीव कुमार ने वरिष्ठ रंगकर्मी रणधीर कुमार के मार्गदर्शन में किया। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को निर्देशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।

बिखरते रिश्तों और बदलते भावनात्मक समीकरणों पर आधारित इस नाटक ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। समकालीन जीवन की जटिलताओं, प्रेम के बदलते अर्थ और आत्म-अभिव्यक्ति की उलझनों को कथानक में संवेदनशीलता के साथ पिरोया गया। संवादों और दृश्य संरचना के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया कि आधुनिक दौर में इमोशन, इश्क और शहर—तीनों ही एक नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। कथासार के अनुसार, नाटक यह प्रश्न उठाता है कि क्या प्रेम बदल रहा है या हम स्वयं बदलते जा रहे हैं। सेल्फी और कवरफोटो के दौर में स्थायी भावनाओं की तलाश कितनी चुनौतीपूर्ण हो गई है, इसे प्रतीकों और स्थितियों के जरिए मंच पर जीवंत किया गया। प्रस्तुति में यह विचार उभरकर सामने आया कि इश्क कोई खबर नहीं, बल्कि आज के भीतर खड़ा एक अनुभव है, जो समय के साथ अपना अंदाज बदलता रहता है।

मंच पर अंजलि शर्मा, सुनील कुमार राम, आदिल रशीद, नियति कश्यप, अमरकान्त राय और शिवम कुमार ने अभिनय किया। कलाकारों के प्रदर्शन में भावनात्मक संतुलन और संवाद अदायगी की सहजता देखने को मिली, जिसे दर्शकों ने सराहा। नेपथ्य में सेट निर्माण की जिम्मेदारी सुनील कुमार शर्मा ने निभाई, जबकि विनय कुमार और अभिषेक ने सहयोग दिया। पेंटिंग कार्य श्रीकांत कुमार, विधान सरकार और आरिश शर्मा द्वारा किया गया। कॉस्ट्यूम का संयोजन अंजलि शर्मा एवं समूह ने संभाला। मंच व्यवस्था सुनील कुमार राम, प्रस्तुति प्रभारी आदिल राशिद, संगीत संयोजन राजीव कुमार और प्रकाश संचालन रणधीर कुमार के निर्देशन में रहा। नाटक का आधार विनीत कुमार की पुस्तक पर रहा, जबकि प्रस्तुति आलेख अंजलि शर्मा, आदिल राशिद और सुनील कुमार राम ने तैयार किया। घोषणा कृष्ण समिधा द्वारा की गई।

सांस्कृतिक जगत के जानकारों के अनुसार, यह प्रस्तुति न केवल विषयवस्तु के कारण बल्कि युवा निर्देशन और सामूहिक टीमवर्क के उदाहरण के रूप में भी उल्लेखनीय रही। रंगशाला में उपस्थित दर्शकों ने नाटक के विचार और प्रस्तुति शैली की सराहना करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।