उपमुख्यमंत्री पद की संख्या में बिहार में इस बार फिर से होगी बदलाव, फिर से बनाएं जाएंगे नए मंत्री

  • Post By Admin on Mar 06 2026
उपमुख्यमंत्री पद की संख्या में बिहार में इस बार फिर से होगी बदलाव, फिर से बनाएं जाएंगे नए मंत्री

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। नई सरकार के गठन को लेकर सत्ता के गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इसी बीच सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आ रही है कि इस बार मंत्रिमंडल के स्वरूप और उपमुख्यमंत्री पद को लेकर महत्वपूर्ण परिवर्तन किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि नई सरकार में सहयोगी दलों के बीच मंत्रियों की संख्या को लेकर लगभग सहमति बन चुकी है और उसी आधार पर मंत्रिमंडल के गठन की तैयारी की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार संभावित फार्मूले के तहत भाजपा कोटे से मुख्यमंत्री सहित लगभग 15 मंत्रियों को शामिल किए जाने की चर्चा है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो मंत्री पद दिए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को एक मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी एक मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है। सहयोगी दलों के बीच इस प्रकार का संतुलन बनाकर सरकार के गठन को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है।

इसी क्रम में जनता दल यूनाइटेड के हिस्से को लेकर भी नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक इस बार उपमुख्यमंत्री पद की संख्या को घटाकर केवल एक किए जाने की बात सामने आ रही है। अब तक बिहार में एक से अधिक उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की परंपरा देखने को मिलती रही है, लेकिन इस बार सत्ता संरचना को अलग तरीके से व्यवस्थित करने की योजना बनाई जा रही है। सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात को लेकर हो रही है, वह उपमुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे को लेकर है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय माना जाएगा, क्योंकि अब तक निशांत कुमार सक्रिय राजनीति से दूर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में बहुत सीमित रूप से ही दिखाई दिए हैं। इसके साथ ही यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है तो उन्हें राज्य के गृह विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। बिहार की राजनीति में गृह मंत्रालय को अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है, क्योंकि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण की दृष्टि से यह विभाग सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रालयों में गिना जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछली सरकार में भाजपा के पास गृह मंत्रालय था और उस समय इसे गठबंधन की शक्ति संतुलन का हिस्सा माना गया था। लेकिन अब यदि मुख्यमंत्री पद बीजेपी के पास रहता है और नई राजनीतिक परिस्थिति बनती है, तो गृह मंत्रालय जदयू के कोटे में जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में यह विभाग उपमुख्यमंत्री के रूप में निशांत कुमार को सौंपा जा सकता है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक किसी भी दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक दलों के नेता सार्वजनिक रूप से इस विषय पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं। लेकिन सत्ता के गलियारों में चल रही चर्चाओं ने बिहार की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह राजनीतिक फार्मूला लागू होता है तो इससे बिहार की सत्ता संरचना में एक नया संतुलन देखने को मिल सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि युवा नेतृत्व को आगे लाने के संकेत के रूप में भी इसे देखा जा सकता है। फिलहाल सबकी निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं, जब मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे को लेकर अंतिम तस्वीर साफ हो सकेगी। तब तक बिहार की राजनीति में इन संभावनाओं और चर्चाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल बनी हुई है।

• खबर में दी गई तस्वीर केवल सांकेतिक है...