बिहार में BJP कोटा से मुख्यमंत्री बनने के बाद जगहों का नाम बदलने का सिलसिला शुरू, कांग्रेस ने साधा निशाना
- Post By Admin on Apr 29 2026
पटना: पटना में स्थित राज्य के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शुमार संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम अब आधिकारिक तौर पर बदलकर “पटना जू” कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और इसे लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
सरकार ने न केवल उद्यान का नाम बदला है, बल्कि इसके संचालन के लिए बनी सोसाइटी का नाम भी “पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी” कर दिया गया है। सरकार का तर्क है कि यह बदलाव पहचान और प्रशासनिक सरलता के लिए किया गया है, जबकि विपक्ष इसे नाम बदलने की राजनीति बता रहा है। कांग्रेस ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि संजय गांधी जैविक उद्यान संयुक्त बिहार की एक महत्वपूर्ण पहचान रहा है और इसे बदलना अनुचित है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार को कुछ नया करना ही था, तो किसी अन्य स्थान पर नया चिड़ियाघर बनाकर उसका नाम रखा जाता, न कि पुराने नाम को हटाया जाता।
इतिहास की बात करें तो इस उद्यान की शुरुआत वर्ष 1969 में एक वनस्पति उद्यान के रूप में हुई थी, जिसे 1973 में जैविक उद्यान का स्वरूप दिया गया। लगभग 153 एकड़ में फैला यह उद्यान समय के साथ देश के प्रमुख चिड़ियाघरों में शामिल हो गया और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनाई। पटना जू की विशेषता केवल इसके जानवर ही नहीं हैं, बल्कि यहां मौजूद 300 से अधिक पौधों की प्रजातियां, टॉय ट्रेन, एक्वेरियम, सांप घर और बोटिंग जैसी सुविधाएं इसे पर्यटकों के लिए खास बनाती हैं। यह एक सींग वाले गैंडों के सफल प्रजनन के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। बिहार में इस उद्यान का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। यह राज्य का सबसे अधिक देखा जाने वाला स्थल है और राजधानी पटना के बीचों-बीच स्थित होने के कारण “ग्रीन लंग्स” की तरह काम करता है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
फिलहाल नाम परिवर्तन को लेकर सियासी घमासान जारी है। एक ओर सरकार इसे जरूरी बदलाव बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के आसार हैं।