चुनाव जीतने के लिए धमाकों की साजिश : पूर्व सीएम के बयान से मचा सियासी तूफान
- Post By Admin on Jan 29 2026
चंडीगढ़ : पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के एक चौंकाने वाले बयान ने राज्य की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। भट्ठल ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें कुछ अधिकारियों ने सत्ता दोबारा हासिल करने के लिए बेहद खतरनाक और आपत्तिजनक सुझाव दिया था, जिसे उन्होंने तुरंत खारिज कर दिया था।
पूर्व सीएम के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने चुनाव से पहले बाजारों और ट्रेनों में धमाके कर दहशत का माहौल बनाने और लोगों को डराकर मनचाहे ढंग से वोट डलवाने का प्रस्ताव रखा था। भट्ठल ने कहा कि यह सुनते ही उन्होंने अधिकारियों को सख्त शब्दों में रोक दिया और साफ कर दिया कि वह लाशों पर राजनीति नहीं करेंगी।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों को चेतावनी दी गई थी कि यदि चुनाव से पहले किसी भी तरह की अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी तय की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भट्ठल ने कहा कि मुख्यमंत्री को कई तरह की सलाह दी जाती है, लेकिन कौन-सी सलाह माननी है और कौन-सी नहीं, यह मुख्यमंत्री के विवेक पर निर्भर करता है। उन्होंने इस तरह के सुझाव को पूरी तरह अमानवीय और लोकतंत्र के खिलाफ बताया।
गौरतलब है कि राजिंदर कौर भट्ठल 21 नवंबर 1996 को मुख्यमंत्री बनी थीं और 11 फरवरी 1997 तक इस पद पर रहीं। हरचरण सिंह बराड़ के इस्तीफे के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया था। वह पंजाब की अब तक की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रही हैं और उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा हो, लेकिन राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
भट्ठल के इस बयान के सामने आते ही सियासी घमासान तेज हो गया है। पुनरसुरजीत अकाली दल के अध्यक्ष और पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि इस बयान से साफ होता है कि सत्ता हासिल करने के लिए किस हद तक जाने की सोच थी। उन्होंने मांग की कि उस समय के सभी अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता दुर्लभ सिद्धू ने कहा कि ऐसे अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए, जिन्होंने इस तरह का सुझाव दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला कांग्रेस पार्टी की किसी बैठक या निर्णय से जुड़ा नहीं है और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। सिद्धू ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि देश और लोकतंत्र के खिलाफ सोच रखने वाले वे अधिकारी कौन थे, ताकि भविष्य में इस तरह की मानसिकता पर रोक लग सके।