CM नीतीश कुमार पहुंचें लोकभवन, निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की तैयारी शुरू
- Post By Admin on Mar 07 2026
पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। इस फैसले को लेकर जहां जदयू के कई नेता और कार्यकर्ता असंतोष जता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों ने इसे लेकर भाजपा और मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच जदयू के भीतर भी इस मुद्दे पर गहन चर्चा का दौर जारी है।
बैठक में उठी फैसले पर पुनर्विचार की मांग
जानकारी के अनुसार जदयू की एक अहम बैठक में कई विधायकों और नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनका राज्यसभा जाने का निर्णय पूरी तरह व्यक्तिगत है और वे किसी दबाव में नहीं हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि बिहार के विकास की जो दिशा तय की गई है, वह रुकनी नहीं चाहिए और वे खुद भी हर गतिविधि पर नजर बनाए रखेंगे।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की चर्चा तेज
बैठक के दौरान जदयू विधायकों ने मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग भी रखी। इसके बाद जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने घोषणा की कि निशांत कुमार ने राजनीति में आने की सहमति दे दी है और वे जल्द ही औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होंगे। नई सरकार के गठन से पहले जदयू नेताओं की बैठक में निशांत कुमार भी मौजूद रहे।
लोक भवन (पूर्व में राजभवन) पहुंचे मुख्यमंत्री
इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अचानक लोक भवन (पूर्व में राजभवन) पहुंचने से भी सियासी अटकलें तेज हो गईं। उनके राजभवन पहुंचने के बाद इस्तीफे की चर्चाएं शुरू हो गईं, हालांकि आधिकारिक तौर पर उनके वहां जाने की वजह स्पष्ट नहीं की गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्यसभा जाना नीतीश कुमार का निजी फैसला है और यह उनका पुराना सपना रहा है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माझी ने आरोप लगाया कि भाजपा क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर बाद में उन्हें कमजोर करती है।
राजद नेता तेजस्वी यादव के आरोपों पर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने पलटवार करते हुए कहा कि नीतीश कुमार स्वतंत्र नेता हैं और वे किसी दबाव में फैसले नहीं लेते। उन्होंने तेजस्वी यादव को अपने परिवार और भ्रष्टाचार के मामलों की चिंता करने की सलाह दी।
विपक्ष ने साधा निशाना
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक रूप से “बंधक” हो गए हैं और उनका यह फैसला स्वतंत्र नहीं है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने कहा कि यदि नीतीश कुमार भाजपा के साथ नहीं गए होते तो उन्हें यह स्थिति नहीं देखनी पड़ती।
इधर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि वे चाहते थे कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनें, लेकिन अब वे राज्यसभा सदस्य बनने जा रहे हैं। बिहार की राजनीति में इस घटनाक्रम के बाद सत्ता समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि राज्य की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।