यूजीसी मामले पर अखिलेश यादव का वार, बोले—कानून की भाषा ही नहीं, नीयत भी होनी चाहिए साफ
- Post By Admin on Jan 29 2026
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर न्याय, संविधान और सरकार की नीतियों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सच्चा न्याय वही है, जिसमें किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो और किसी को भेदभाव का शिकार न बनाया जाए। उनका कहना था कि किसी भी कानून या नियम की केवल भाषा ही नहीं, बल्कि उसकी नीयत और भाव भी स्पष्ट और निष्पक्ष होने चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि माननीय न्यायालय का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोषी को सजा मिले और निर्दोष को न्याय। उन्होंने जोर देकर कहा कि न तो किसी का उत्पीड़न होना चाहिए, न किसी पर जुल्म-ज्यादती और न ही किसी को अन्याय का सामना करना पड़े। उन्होंने चिंता जताई कि देश में संविधान और कानून होने के बावजूद समय-समय पर भेदभाव और नाइंसाफी की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने यूजीसी के पुराने नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2012 में भी ऐसे रेगुलेशन लागू किए गए थे, लेकिन यह देखने की जरूरत है कि उस दौरान क्या कमियां रहीं और विश्वविद्यालयों में व्यवहार कैसा रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुराने अनुभवों से कोई सबक लिया गया और क्या नए नियमों को बनाते समय उन कमियों को दूर किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान साफ तौर पर कहता है कि किसी भी स्तर पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और हर नीति उसी भावना पर आधारित होनी चाहिए।
यूजीसी के मुद्दे के साथ-साथ अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार युवाओं को रोजगार देने में विफल रही है और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। साथ ही महंगाई ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग सभी महंगाई से परेशान हैं, खेती की लागत बढ़ती जा रही है लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि किसानों की मेहनत का फायदा बिचौलियों को मिल रहा है और सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि रोजगार, किसानों की आय दोगुनी करने और महंगाई पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियां पूरी तरह विफल रही हैं।
यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आए इस बयान को राजनीतिक हलकों में काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि शिक्षा, सामाजिक न्याय और आर्थिक मुद्दों को जोड़ते हुए अखिलेश यादव के इस बयान से आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज हो सकती है।