गर्मी में बढ़ा डायरिया का खतरा, बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट जारी

  • Post By Admin on Mar 18 2026
गर्मी में बढ़ा डायरिया का खतरा, बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट जारी

लखीसराय : गर्मी के बढ़ते तापमान के साथ बच्चों में डायरिया के मामलों में वृद्धि की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से सतर्क रहने और बच्चों के खानपान व स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की अपील की है।

अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने बताया कि गर्मी के मौसम में डायरिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसका मुख्य कारण बैक्टीरिया और वायरस से होने वाला संक्रमण, गंदा पानी, बासी भोजन तथा स्वच्छता की कमी है। गर्मी में खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे भोजन जनित बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि डायरिया होने पर बच्चों में पेट दर्द, दस्त, उल्टी, बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में मल में खून या म्यूकस भी आ सकता है। दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है, जो बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

डिहाइड्रेशन के लक्षण

गला सूखना, अत्यधिक प्यास लगना, पेशाब कम या गाढ़ा होना, कमजोरी, सुस्ती और चक्कर आना इसके प्रमुख संकेत हैं।

बचाव के उपाय

डॉ. भारती ने बताया कि डायरिया से बचाव के लिए स्वच्छता और खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

  • पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पिएं
  • पानी उबालकर ठंडा करके ही सेवन करें
  • ओआरएस घोल का उपयोग करें
  • नारियल पानी का सेवन लाभकारी है
  • कटे व खुले खाद्य पदार्थों से परहेज करें
  • फलों व सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाएं
  • चिकित्सक की सलाह से दवा लें

छोटे बच्चों के लिए विशेष सावधानी

नवजात और छोटे बच्चों में डायरिया की रोकथाम के लिए नियमित स्तनपान बेहद जरूरी है। साथ ही, ओआरएस घोल को छोटे-छोटे घूंट में देना चाहिए। मां को शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए और बच्चे के संतुलित आहार का ध्यान रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास ओआरएस और जिंक की गोलियां उपलब्ध हैं, जिनका समय पर सेवन डायरिया की रोकथाम में सहायक होता है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि गर्मी के मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं।