दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल : बिहार के अमर ज्योति झा बने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और अभिनेता

  • Post By Admin on Apr 04 2026
दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल : बिहार के अमर ज्योति झा बने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और अभिनेता

नई दिल्ली : राजधानी में आयोजित प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में बिहार के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म निर्माता-निर्देशक एवं अभिनेता अमर ज्योति झा को उनकी फिल्म रीबर्थ (पुनर्जन्म) के लिए दो बड़े पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं फिल्म की उत्कृष्ट छायांकन के लिए रंजीत के सिंह को सर्वश्रेष्ठ छायांकन का सम्मान मिला।

फिल्म रीबर्थ (पुनर्जन्म) ने इस फेस्टिवल में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यह उपलब्धि न केवल फिल्म की गुणवत्ता को दर्शाती है, बल्कि बिहार की रचनात्मक प्रतिभा को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का काम कर रही है।

फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। रीबर्थ (पुनर्जन्म) का चयन अमेरिका में आयोजित ऑस्कर अवॉर्ड क्वालीफाइंग फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीनिंग के लिए हो चुका है और यह पुरस्कार के लिए भी नामांकित रही है। अब तक देश-विदेश के विभिन्न फिल्म समारोहों में इस फिल्म को 50 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

फिल्म के मुख्य सहायक निर्देशक विकास बच्चन और प्रोडक्शन मैनेजर संजय साह हैं। इस फिल्म की विशेषता यह है कि इसके सभी कलाकार और तकनीकी सहयोगी बिहार से जुड़े हैं। फिल्म की शूटिंग बिहार के विभिन्न स्थानों के साथ-साथ वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर की गई है।

अमर ज्योति झा को बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड द्वारा भी प्रमुख वक्ता के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बिहार सरकार और निगम द्वारा राज्य में फिल्म निर्माण के लिए बनाए जा रहे अनुकूल माहौल की सराहना करते हुए कहा कि बिहार में सिनेमा के क्षेत्र में व्यापक विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित फिल्म समारोह का सफल आयोजन अमोल भगत के नेतृत्व में किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कलाकारों, फिल्म समीक्षकों और तकनीशियनों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा से जुड़े कई रचनात्मक व्यक्तित्वों ने भाग लेते हुए सिनेमा के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश देने पर बल दिया।