भारत-यूके एफटीए आज से प्रभावी, कई आयातित उत्पाद होंगे सस्ते

  • Post By Admin on Jul 15 2026
भारत-यूके एफटीए आज से प्रभावी, कई आयातित उत्पाद होंगे सस्ते

नई दिल्ली : भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) बुधवार से प्रभावी हो गया। इसे भारत के अब तक के सबसे व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) में से एक माना जा रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि इस समझौते से किसानों, श्रमिकों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निर्यातकों, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलेगा तथा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी।

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में लागू होने वाला छठा मुक्त व्यापार समझौता है। इससे पहले भारत मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) और ओमान के साथ ऐसे समझौते लागू कर चुका है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि सीईटीए केवल आयात-निर्यात शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश, सेवाओं और रोजगार के नए अवसरों का व्यापक ढांचा तैयार करेगा। इससे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होंगी तथा भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

समझौते के तहत भारत के करीब 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। वहीं, ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर सीमा शुल्क घटने से उनकी कीमतों में भी कमी आने की संभावना है। सीईटीए के लागू होने के साथ पहली बार ब्रिटेन की कंपनियों को भारत सरकार की लगभग 40 हजार उच्च मूल्य वाली सरकारी निविदाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे परिवहन, हरित ऊर्जा और बुनियादी ढांचा जैसे क्षेत्रों में निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।

इस समझौते में कुल 30 अध्याय शामिल हैं, जिनमें डिजिटल व्यापार, सरकारी खरीद, एमएसएमई, निवेश, बौद्धिक संपदा, श्रम, पर्यावरण और सेवा क्षेत्र से जुड़े नियमों को सरल बनाया गया है। समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की पर वर्तमान 150 प्रतिशत आयात शुल्क पहले चरण में घटाकर 75 प्रतिशत किया जाएगा, जबकि अगले 10 वर्षों में इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इसी तरह ब्रिटेन में निर्मित पूरी तरह तैयार कारों पर आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही रियायत मिलेगी, जबकि इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाहनों को छठे वर्ष से इसका लाभ मिलेगा, ताकि शुरुआती पांच वर्षों तक भारतीय ईवी उद्योग को संरक्षण मिल सके।

समझौते के अनुसार पहले 15 वर्षों में रियायती शुल्क पर 3.78 लाख ब्रिटिश यात्री वाहनों के आयात की अनुमति होगी। वहीं ट्रकों पर आयात शुल्क 44 प्रतिशत से घटकर पांचवें वर्ष तक 8.8 प्रतिशत रह जाएगा। हालांकि भारत ने सेब, अखरोट, व्हे, कुछ बीज, सोने की ईंटों और स्मार्टफोन जैसे संवेदनशील उत्पादों पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है। दूसरी ओर ब्रिटेन ने भी चावल, चीनी और कुछ मांस उत्पादों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है। समझौते के साथ लागू हुए 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्षों तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा। इससे भारतीय पेशेवरों और कंपनियों की लागत में कमी आएगी।

सीईटीए से रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल-सब्जियां, मसाले, मछली एवं समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट और स्टोन उद्योगों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं, स्कॉच व्हिस्की, सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम और नेल पॉलिश जैसे कई आयातित उत्पाद आने वाले समय में भारतीय बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते हो सकते हैं।