नई पीढ़ी के लिए प्रेमचंद सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत : प्रो. रमेश
- Post By Admin on Jul 31 2026
मुजफ्फरपुर : कालजयी कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर रामदयालु सिंह महाविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग द्वारा ‘प्रेमचंद की महत्ता’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता ने की। संगोष्ठी का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर श्रद्धा-पुष्प अर्पित कर किया गया।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता ने कहा कि हिन्दी प्रदेश का कोई भी अध्येता, शिक्षक या बुद्धिजीवी जब हिन्दी में अपने ज्ञान और विचार व्यक्त करता है, तो वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हिन्दी समाज और उसकी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद हिन्दी समाज के सर्वाधिक लोकप्रिय और सर्वस्वीकार्य साहित्यकार हैं, इसलिए नई पीढ़ी को उनके साहित्य और विचारों से परिचित कराना हिन्दी भाषियों का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज को रूढ़ियों और जड़ता से मुक्त करने का रचनात्मक प्रयास किया। उनकी रचनाओं ने हिन्दी भाषी समाज को अधिक लोकतांत्रिक, समतामूलक और मानवीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने भी प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. हसन रज़ा ने प्रेमचंद को हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं का महान साहित्यकार बताते हुए कहा कि वे उत्कृष्ट अनुवादक भी थे और उन्होंने अपनी कई रचनाओं का दोनों भाषाओं में अनुवाद किया। मनोविज्ञान विभाग के डॉ. सौरभ ने प्रेमचंद के साहित्य में मनोवैज्ञानिक दृष्टि की चर्चा करते हुए कहानी ‘ईदगाह’ में बाल मनोविज्ञान के चित्रण को अत्यंत प्रभावशाली बताया। राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रजनीकांत ने ‘दो बैलों की कथा’ और ‘सद्गति’ के माध्यम से प्रेमचंद की सामाजिक चेतना और यथार्थवादी लेखनी पर प्रकाश डाला।
भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. आयशा जमाल ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियां पाठकों की भावनाओं को गहराई से स्पर्श करती हैं और सामाजिक संवेदना को जागृत करती हैं। हिन्दी विभाग के डॉ. नीरज मिश्रा ने प्रेमचंद की साहित्यिक महत्ता को व्यापक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया। अंग्रेजी विभाग की डॉ. आरती ने प्रेमचंद और मंटो की तुलना करते हुए कहा कि प्रेमचंद अपने समाज की वास्तविकताओं को ईमानदारी से अभिव्यक्त करने वाले सच्चे लेखक थे। इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. एम.एन. रजवी ने कहा कि इतिहास महान व्यक्तित्वों को कभी मरने नहीं देता और प्रेमचंद जयंती का यह आयोजन उसी ऐतिहासिक स्मृति का प्रमाण है। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. नीलिमा झा ने कहा कि प्रेमचंद केवल हिन्दी समाज के नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीयता के प्रतिनिधि लेखक हैं।
संगोष्ठी में स्नातकोत्तर और स्नातक हिन्दी विभाग के छात्र-छात्राओं — सचिन कुमार, गुंजा, साक्षी, कनिष्का, मुस्कान, अंकिता, हीना और चाँदनी — ने भी प्रेमचंद की प्रासंगिकता और सामाजिक दृष्टि पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विभाग की प्राध्यापिका दिव्या ने किया। इस अवसर पर डॉ. सुमनलता, डॉ. कृतिका वर्मा, डॉ. नियाज अहमद, डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. चौधरी संजय, डॉ. संध्या कुमारी, डॉ. विकास कुमार, डॉ. पंकज तिवारी, डॉ. अमर ज्योति रंजन, डॉ. अम्बिका, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. गणेश शर्मा, डॉ. भैरवी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।