उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बावजूद गिरफ्तारी का आरोप, लखीसराय पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
- Post By Admin on Jul 10 2026
लखीसराय : चानन थाना कांड संख्या 169/2025 से जुड़े एक मामले में लखीसराय पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम संरक्षण दिए जाने के बावजूद एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले को लेकर न्यायिक आदेशों के अनुपालन और विधि के शासन पर बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, चानन थाना क्षेत्र के शिवडीह निवासी स्वर्गीय टेनी यादव के पुत्र सुदामा यादव एवं उनकी पत्नी रुक्मणी देवी ने चानन थाना कांड संख्या 169/2025 में अग्रिम जमानत के लिए पटना उच्च न्यायालय में क्रिमिनल मिसलेनियस संख्या 23436/2026 दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि 17 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया था। यह भी दावा किया गया है कि आदेश की प्रति संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध करा दी गई थी।
इसके बावजूद आरोप है कि चानन थाना पुलिस ने सुदामा यादव को गिरफ्तार कर प्रभारी अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (प्रथम), लखीसराय की अदालत में प्रस्तुत किया, जहां से 8 जुलाई 2026 को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले को लेकर विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गिरफ्तारी के समय उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश प्रभावी था और उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ऐसे मामले न्यायिक आदेशों के अनुपालन, संवैधानिक अधिकारों तथा विधि के शासन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े करते हैं।
इस घटना के बाद अधिवक्ताओं और विधि जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। उनका मानना है कि यदि न्यायालय के प्रभावी आदेशों के पालन को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इससे न्याय व्यवस्था में आम लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है। फिलहाल इस मामले में पुलिस या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।