दरभंगा राज परिवार की ऐसी थी दूरदर्शिता कि उस वक्त बना दिया था विश्व रिकॉर्ड

  • Post By Admin on Jan 17 2026
दरभंगा राज परिवार की ऐसी थी दूरदर्शिता कि उस वक्त बना दिया था विश्व रिकॉर्ड

दरभंगा: बिहार के औद्योगिक और सामाजिक इतिहास में दरभंगा राज परिवार का योगदान सदैव स्मरणीय रहा है। वर्ष 1874 में दरभंगा राज परिसर में जिस निजी रेल लाइन की आधारशिला रखी गई, उसने न सिर्फ तत्कालीन तिरहुत क्षेत्र की तस्वीर बदली, बल्कि विकास के एक नए युग की शुरुआत भी की। वाजितपुर से नरगौना टर्मिनल तक फैली 55 मील लंबी इस रेल लाइन का निर्माण महज 62 दिनों में पूरा किया गया था, जिसे उस दौर में एक विश्व रिकॉर्ड के रूप में देखा गया।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि वाजितपुर से चली पहली ट्रेन जब दरभंगा पहुँची, तो यह केवल एक रेल यात्रा नहीं, बल्कि प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने के लिए दरभंगा राज परिवार ने तिरहुत रेलवे कंपनी की स्थापना की, जिसका मुख्यालय दरभंगा स्थित ऐतिहासिक मोती महल को बनाया गया।

रेल लाइन निर्माण का दायित्व इंग्लैंड की एक प्रतिष्ठित कंपनी को सौंपा गया था, जबकि दूरसंचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तार बिछाने का ठेका दरभंगा राज के प्रमुख सहयोगी रमेश्वर सिंह उर्फ लंगट सिंह को दिया गया। रेल और संचार के इस संयुक्त प्रयास ने पूरे क्षेत्र को व्यापार, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए। इस रेलखंड की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इससे स्थानीय लोगों को रोज़गार के लिए गिरमिटिया मजदूर बनकर विदेश जाने की मजबूरी से राहत मिली। स्थानीय स्तर पर ही आजीविका के साधन उपलब्ध होने लगे और तिरहुत क्षेत्र सामाजिक-आर्थिक रूप से सशक्त होता चला गया।

आज भी 1874 में बिछी यह निजी रेल लाइन दरभंगा राज परिवार की दूरदर्शिता, प्रशासनिक क्षमता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण मानी जाती है। यह पहल न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के रेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है।