चीन पर निर्भरता खत्म करने का मास्टरप्लान, चार राज्यों में बनेंगे रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर

  • Post By Admin on Feb 01 2026
चीन पर निर्भरता खत्म करने का मास्टरप्लान, चार राज्यों में बनेंगे रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर

नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने देश के रणनीतिक और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा ऐलान किया है। वित्त मंत्री ने संसद में जानकारी दी कि भारत में ‘रेयर अर्थ मिनरल’ के लिए विशेष कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिनका निर्माण देश के चार राज्यों में किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य इस अहम सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और वर्षों से चली आ रही चीन पर निर्भरता को खत्म करना है।

सरकार के अनुसार, इन कॉरिडोर के जरिए रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन को तेज और अधिक भरोसेमंद बनाया जाएगा। इससे न सिर्फ घरेलू उद्योगों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर भी इस सेक्टर में मजबूत भूमिका निभा सकेगा।

वित्त मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारत अपनी जरूरत के करीब 90 प्रतिशत रेयर अर्थ एलिमेंट्स चीन से आयात करता है, जो रणनीतिक दृष्टि से एक बड़ा जोखिम माना जाता है। रेयर अर्थ एलिमेंट्स आज इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, रक्षा उपकरणों और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग की रीढ़ हैं। ऐसे में सरकार ने घरेलू स्तर पर इन खनिजों की खोज और उत्पादन क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता दी है, ताकि भविष्य में किसी भी भू-राजनीतिक संकट का असर देश की सप्लाई चेन पर न पड़े।

इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई है। जनवरी 2025 में शुरू किए गए ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत 16,300 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है, जिसके अंतर्गत करीब 1,200 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट और प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा नवंबर 2025 में रेयर अर्थ मैग्नेट्स के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए 7,350 करोड़ रुपए की पीएलआई स्कीम लॉन्च की गई थी, जिसके तहत देश में 6,000 एमटीपीए की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार ने नीतिगत स्तर पर भी बड़े सुधार किए हैं। एमएमडीआर एक्ट में संशोधन कर रेयर अर्थ एलिमेंट्स को ‘पार्ट डी’ में शामिल किया गया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खुला है। अब तक 20 से अधिक ब्लॉक्स की नीलामी भी की जा चुकी है। इसके साथ ही मोनाजाइट को एटॉमिक लिस्ट से बाहर कर दिया गया है, ताकि खनन परियोजनाओं में तेजी लाई जा सके। परियोजनाओं में देरी से बचने के लिए सितंबर 2025 में क्रिटिकल मिनरल प्रोजेक्ट्स को जन सुनवाई से भी छूट दी गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘रेयर अर्थ मिनरल कॉरिडोर’ भारत की रणनीतिक सुरक्षा और औद्योगिक भविष्य के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। इससे न सिर्फ चीन की मोनोपोली को चुनौती मिलेगी, बल्कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर सकेगा।