बजट 2026-27 : टैक्स स्लैब नहीं हुआ कोई बदलाव, ITR की बढ़ी डेडलाइन
- Post By Admin on Feb 01 2026
नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करदाताओं के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिसके तहत आयकर से जुड़े नियमों को पहले से ज्यादा सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
वित्त मंत्री ने बताया कि छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई स्कीम लाई जा रही है, जिससे टैक्स अनुपालन की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही सरकार ने आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है। इससे करोड़ों वेतनभोगी और छोटे करदाताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि नए टैक्स कानूनों के तहत इनकम टैक्स फॉर्म को सरल बनाया गया है और पूरी टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली किया गया है, ताकि करदाताओं को कम समय में और बिना किसी जटिलता के रिटर्न दाखिल करने में सुविधा हो।
वित्त मंत्री ने संसद को बताया कि सरकार ने 2021-22 में किए गए राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के वादे को काफी हद तक पूरा कर लिया है। बजट अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में यह घटकर 4.3 प्रतिशत तक आने की उम्मीद है। सरकार का मुख्य फोकस वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को गति देना है।
बजट में राज्यों के लिए भी बड़ी राहत की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2027 में राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपए की ग्रांट दी जाएगी। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2027 के लिए डेट-टू-जीडीपी रेश्यो 55.6 प्रतिशत और नेट बॉरोइंग 11.7 लाख करोड़ रुपए तय किया गया है।
बजट 2026 में टीसीएस दरों में भी अहम कटौती की गई है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए भेजी जाने वाली राशि पर टीसीएस को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे उन परिवारों को सीधी राहत मिलेगी, जो शिक्षा या चिकित्सा कारणों से विदेश पैसा भेजते हैं।
इसके अलावा टैक्स नियमों में स्पष्टता लाने के लिए सरकार ने यह भी तय किया है कि मानव संसाधन सेवाओं की आपूर्ति को ठेकेदारों को किए गए भुगतानों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके तहत अब इन सेवाओं पर केवल 1 या 2 प्रतिशत टीडीएस लगेगा, जिससे कारोबारियों और श्रमिकों दोनों को टैक्स अनुपालन में सहूलियत मिलेगी।