बीआरए बिहार विवि में दूसरे दिन भी आधा घंटा ठप रहा काम, विधेयक वापसी की मांग
- Post By Admin on Aug 12 2026
मुजफ्फरपुर : राज्य सरकार द्वारा लाए जा रहे 'विश्वविद्यालय अधिनियम-2026' को लेकर बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में असंतोष की लहर तेज हो गई है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने के आरोपों के बीच 'बिहार राज्य विश्वविद्यालय व महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा' के आह्वान पर बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय (मुजफ्फरपुर) में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी है।
आंदोलन के तीसरे चरण के तहत आज लगातार दूसरे दिन भी दोपहर 1:30 बजे से 2:00 बजे तक विश्वविद्यालय के सभी विभागों और अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों व कर्मचारियों ने आधे घंटे का सांकेतिक धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने अपने-अपने कार्यस्थल पर लामबंद होकर राज्य सरकार की इस मंशा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और प्रस्तावित विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की।
नेतृत्व ने कहा: 'एकजुटता से ही रुकेगा काला कानून'
संघर्ष मोर्चा के संयोजक मंडल के प्रमुख सदस्यों—डॉ. सुनील कुमार सिंह, प्रो. रमेश प्रसाद गुप्ता, प्रो. ललन कुमार झा, श्री राजीव कुमार एवं श्री राम कुमार ने आंदोलन को मिल रहे व्यापक समर्थन पर सभी शिक्षक-कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मोर्चा के संयोजकों ने एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि 11 अगस्त से शुरू हुआ यह सांकेतिक विरोध प्रदर्शन 25 अगस्त तक रोजाना इसी समय (1:30 से 2:00 बजे तक) चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इस विधेयक को निरस्त करने का निर्णय नहीं लेती, तब तक यह लड़ाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।
5 सितंबर को सड़कों के बजाय छात्रों के बीच होगी चर्चा
आंदोलन की आगे की रणनीति साझा करते हुए मोर्चा ने चौथे चरण का ऐलान भी दोहराया। इसके तहत आगामी 05 सितम्बर, 2026 (शिक्षक दिवस) को राज्यभर के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी एक विशेष 'छात्र-संवाद' कार्यक्रम का आयोजन करेंगे। इस संवाद के जरिए विद्यार्थियों को यह समझाया जाएगा कि इस नए विधेयक के लागू होने से उच्च शिक्षा का ढांचा, शैक्षणिक स्वतंत्रता और छात्र हित किस प्रकार प्रभावित होंगे।