वेद प्रचार सप्ताह के पांचवें दिन यज्ञ और संस्कार सम्मेलन, संस्कारित जीवन का दिया संदेश

  • Post By Admin on Sep 01 2026
वेद प्रचार सप्ताह के पांचवें दिन यज्ञ और संस्कार सम्मेलन, संस्कारित जीवन का दिया संदेश

मुजफ्फरपुर: घिरनी पोखर स्थित आर्य समाज मुजफ्फरपुर की ओर से आयोजित वेद प्रचार सप्ताह के पांचवें दिन प्रातःकालीन सत्र में यजुर्वेद पारायण महायज्ञ, प्रवचन एवं भजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आर्य समाज से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।

यज्ञ के ब्रह्मा प्रो. (डॉ.) व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक ने कहा कि यज्ञ मानव का श्रेष्ठतम कर्म है। यज्ञ के माध्यम से व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व के कल्याण की भावना को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ से जीवन को सुखमय और सकारात्मक बनाने की प्रेरणा मिलती है।बैरगनिया से पहुंचे आचार्य सदानन्द शास्त्री ने पंचमहायज्ञों में प्रथम ब्रह्मयज्ञ के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ब्रह्मयज्ञ को संध्या कहा जाता है और इसे संधिवेला में किया जाता है। उन्होंने सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय प्रत्येक व्यक्ति से संध्या करने का आह्वान किया। उनके अनुसार, संध्या के मंत्रों के पाठ, चिंतन और मनन से मन को शांति एवं आनंद की अनुभूति होती है।कार्यक्रम के दौरान स्वामी राजेन्द्र योगी सरस्वती एवं पं. ज्ञानचंद आर्य ने भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी। यजुर्वेद पारायण महायज्ञ में सात जोड़ी यजमान दंपतियों सहित बड़ी संख्या में आर्य नर-नारियों ने हिस्सा लिया और विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञ में संतोष कुमार-रूबी कुमारी, कृष्ण चंद्र प्रसाद-सुशीला आर्या, सत्येन्द्र नारायण शर्मा-भारती शर्मा, कमलेश दिव्यदर्शी-संजना कुमारी, वेदप्रकाश-निशा कुमारी, भागवत प्रसाद आर्य-रेणु देवी तथा परमानन्द तिवारी-चन्द्रकांता तिवारी सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हुए।

वहीं, शाम के सत्र में स्वामी राजेन्द्र योगी सरस्वती की अध्यक्षता में संस्कार सम्मेलन आयोजित किया गया। विषय प्रवेश करते हुए आचार्य कमलेश दिव्यदर्शी ने कहा कि संस्कारों के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन में देवत्व के गुणों को विकसित कर सकता है। प्रो. (डॉ.) व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक ने कहा कि गर्भाधान से अंत्येष्टि तक कुल 16 संस्कार बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारयुक्त जीवन व्यक्ति को पूर्ण मानवता की ओर ले जाता है। इससे मनुष्य ज्ञानवान, चरित्रवान और आस्तिक जीवन की ओर अग्रसर होता है। संस्कार सम्मेलन को स्वामी राजेन्द्र योगी सरस्वती, डॉ. ऋचा योगमयी खगड़िया, आचार्य सदानन्द शास्त्री एवं पं. ज्ञान चंद आर्य ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने लोगों से आर्य समाज से जुड़ने और संस्कारयुक्त जीवन जीने का संदेश दिया।