जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा "विकल्प" का दो दिवसीय शिविर शुरू, संस्कृति और सामाजिक बदलाव पर मंथन
- Post By Admin on Jun 20 2026
मुजफ्फरपुर: बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा "विकल्प" की मुजफ्फरपुर जिला कमिटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय शिक्षण शिविर का शुभारंभ शुक्रवार को झंडोत्तोलन, पुष्पांजलि एवं शहीद गीत के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत जिला कमिटी के अध्यक्ष बाबूलाल सहनी ने झंडोत्तोलन कर की। इस दौरान उपस्थित साथियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मालीघाट इकाई के अध्यक्ष अरुण कुमार वर्मा ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। शिविर के पहले सत्र में संगठन के इतिहास पर चर्चा करते हुए नंदकिशोर तिवारी ने बताया कि "विकल्प" की स्थापना ग्रामीण क्षेत्र साहेबगंज से साथी यादवचंद्र के नेतृत्व में हुई थी। समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ और आज यह देशव्यापी जनवादी सांस्कृतिक संगठन के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। उन्होंने कहा कि विभिन्न जनसंगठनों के सहयोग से संगठन ने समाज में सांस्कृतिक चेतना फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
इसके बाद अरुण कुमार वर्मा ने संगठन की शहरी गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन ने शहर के विभिन्न मंचों से लेकर कोलकाता के ईडेन गार्डन तक अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अलग पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने में साथी यादवचंद्र का उल्लेखनीय योगदान रहा, जिसका सकारात्मक प्रभाव आज भी देखने को मिल रहा है। कार्यक्रम के दौरान जागृति बैरिया एवं साहेबगंज इकाई के कलाकारों ने जनवादी गीत "सुनो भाई सुनो, कि राजा झूठ बोल रहा..." की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार रखते हुए कृष्णनंदन ने प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य राजनीति के पीछे नहीं, बल्कि उसके आगे मशाल लेकर चलने वाली शक्ति है। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति समाज में पाखंड, जातिवाद, धार्मिक कट्टरता तथा साम्राज्यवाद जैसी प्रवृत्तियों के विरुद्ध जनचेतना पैदा करने का प्रभावी माध्यम हैं।
लोक कलाकार सुनील कुमार ने "गाए चलो जिंदगी के गीत" की प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक संघर्ष और जनजागरण का संदेश दिया। दूसरे सत्र में विकल्प की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य धीरेन्द्र धीरू ने "दर्शन क्यों जरूरी है?" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि चेतना मानव मस्तिष्क की सबसे मूल्यवान उपलब्धि है और सामाजिक परिवर्तन निरंतर द्वंद्व एवं विचार प्रक्रिया से ही संभव होता है।इसके बाद जागृति बैरिया इकाई के चंद्रमोहन ने "सांस्कृतिकर्म में दर्शन का महत्व" विषय पर कहा कि सामाजिक परिवर्तन में संस्कृतिकर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संस्कृति, राजनीति और सामाजिक बदलाव एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं और किसी भी सांस्कृतिक संगठन के लिए स्पष्ट वैचारिक आधार आवश्यक है। कार्यक्रम के समापन से पूर्व विभिन्न इकाइयों के कलाकारों ने संयुक्त रूप से जनवादी गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता अरुण कुमार वर्मा एवं बाबूलाल सहनी ने संयुक्त रूप से की।
शिविर में अली मोहम्मद, नारायण कुमार, विभाकर विमल, मखसूस आलम, महेंद्र भगत, रवि रंजन, रामबाबू, सौरव, रणधीर, अमन, पूजा, रिया, बिंदिया, साक्षी, आनंद, आर्यन, अर्णव, निधि, शिवम, रोहन, आदित्य, राजू, कृष्णा, बेबी सहित बड़ी संख्या में सदस्य एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि शिविर के दूसरे दिन अपसंस्कृति, समान शिक्षा, महंगाई और नशाखोरी के खिलाफ जनजागरण के उद्देश्य से प्रभातफेरी निकाली जाएगी।