रेल गेट पर बंदरों का आतंक: सिग्नल सिस्टम से छेड़छाड़, गेटमैन की बढ़ी मुश्किलें
- Post By Admin on Apr 28 2026
छपड़ा : बिहार के छपरा-सीवान रेलखंड से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां अब बंदर रेलवे सिग्नल व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। चैनवा और महेंद्रनाथ स्टेशन के बीच चाड़वां रेल गेट पर बंदरों की शरारत ने रेल संचालन के साथ-साथ गेटमैन की नौकरी पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, जैसे ही ट्रेनों को ग्रीन सिग्नल मिलता है, पास के पेड़ों पर बैठे बंदर इलेक्ट्रॉनिक गेट पर कूद पड़ते हैं। उनकी इस उछल-कूद से गेट का लॉक खुल जाता है और सिग्नल अचानक लाल हो जाता है। इससे ट्रेन संचालन बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है और हर बार गेटमैन को दौड़कर स्थिति संभालनी पड़ती है। गेटमैन धर्मेंद्र ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से हालात बेहद खराब हो गए हैं। गेट के पास लगे बड़े पेड़ पर बंदरों का झुंड डेरा डाले हुए है और जैसे ही गेट बंद होता है, वे इलेक्ट्रिक सिस्टम पर कूदने लगते हैं। उन्हें भगाने के लिए गेटमैन को लाठी-डंडे का सहारा लेना पड़ रहा है।
इस समस्या ने तकनीकी स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। बंदरों की वजह से इलेक्ट्रिक गेट और सिग्नल सिस्टम में गड़बड़ी की आशंका बनी हुई है, जिससे स्वचालित सिग्नल तकनीक प्रभावित हो सकती है और ट्रेनों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। स्थिति यह हो गई है कि गेटमैन को एक साथ कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं—एक ओर बंदरों को भगाना, दूसरी ओर ट्रेन को सुरक्षित सिग्नल देना। वहीं, गेट बंद होने के दौरान खड़े वाहन चालक भी बंदरों के डर से परेशान नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, रेलवे विभाग ने इस समस्या को लेकर वन विभाग से संपर्क किया है और बंदरों को पकड़कर हटाने की मांग की गई है। फिलहाल, यह अनोखी लेकिन गंभीर समस्या रेलवे प्रशासन के लिए नई चुनौती बनकर उभर रही है।