बदलते दौर में मीडिया की भूमिका पर विमर्श, राजेन्द्र प्रसाद सिंह बोले- आजादी के समय की पत्रकारिता से सीखें

  • Post By Admin on Nov 02 2026
बदलते दौर में मीडिया की भूमिका पर विमर्श, राजेन्द्र प्रसाद सिंह बोले- आजादी के समय की पत्रकारिता से सीखें

मुजफ्फरपुर : आजादी के समय की पत्रकारिता में जिस निष्पक्षता, निर्भीकता और जनसरोकार को महत्व दिया जाता था, आज के मीडिया को उससे सीख लेने की जरूरत है। समय के साथ भारतीय मीडिया की भूमिका और उसके स्वरूप में बदलाव आया है। इसी के साथ पत्रकारिता की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। ये बातें इतिहासकार एवं लेखक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहीं।

वे रविवार को मुजफ्फरपुर के आमगोला स्थित एक निजी बैंक्वेट हॉल में एएस फाउंडेशन की ओर से आयोजित विमर्श कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। ‘अप्पन समाचार’ पुस्तक के संदर्भ में ‘भारतीय मीडिया : सच के कितने पास, तथ्य से कितने परे’ विषय पर इस कार्यक्रम में पत्रकारिता की मौजूदा स्थिति, उसकी चुनौतियों और पारंपरिक एवं वैकल्पिक मीडिया की भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में लेखक एवं चिंतक डॉ. हरिनारायण ठाकुर ने कहा कि मीडिया को अपनी निष्पक्ष भूमिका और मूल उद्देश्य को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि पारंपरिक पत्रकारिता अपने मूल सरोकारों से दूर होती दिखाई दे रही है। इस दौरान उन्होंने ‘अप्पन समाचार’ के प्रयासों की सराहना भी की। लेखक एवं संस्कृति से जुड़े अरुण नारायण ने बिहार में पत्रकारिता के इतिहास का उल्लेख करते हुए पारंपरिक और वैकल्पिक मीडिया की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और समाज में उसके प्रभाव के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पारंपरिक और वैकल्पिक मीडिया पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। पैनल में डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. राजीव कुमार, भूपाल भारती, अशोक भारती, राजा ठाकुर, अमृतांज इंदीवर और संतोष सारंग शामिल रहे। चर्चा के दौरान श्रोताओं ने पत्रकारिता की विश्वसनीयता में आ रही चुनौतियों और मीडिया की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। इस अवसर पर कठपुतली कलाकार सुनील सरला ने कठपुतली प्रस्तुति के माध्यम से लोकतांत्रिक मीडिया की प्रवृत्तियों में आए बदलाव को दर्शाया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुशांत कुमार और संतोष सारंग ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हेम नारायण विश्वकर्मा ने किया।

विमर्श में डॉ. रामेश्वर राय, डॉ. ललन भगत, डॉ. विष्णुदेव यादव, डॉ. अविनाश कुमार, सोनू सरकार, मदन प्रसाद, बैजू कुमार, फुलदेव पटेल, नीरज कुमार, अमरेंद्र कुमार, यशोदा कुमारी पासवान, डॉ. रिंकु कुमारी, अनीता कुमारी, सिमरन सहनी, मुन्ना कुमार, लालबाबू पटेल और राकेश रंजन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।