'पढ़ना है मुझे पढ़ना है' : शिक्षक दिवस पर कठपुतली कला के जरिए दिया गया शिक्षा और संस्कारों का मंत्र
- Post By Admin on Sep 05 2026
मुजफ्फरपुर : शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में सामाजिक संस्था 'एक्टिविस्ट 100' के तत्वावधान में लकड़ीढाही स्थित C1 कोचिंग कैंपस में गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका, शिक्षा के मूल उद्देश्यों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार सुनील कुमार की अनूठी प्रस्तुति रही। उन्होंने अपनी पारंपरिक कला और गीतों के जरिए शिक्षा व सामाजिक चेतना का प्रभावी संदेश दिया। सुनील कुमार ने “अंगूठी के नगीना” तथा “पढ़ना है मुझे पढ़ना है” जैसे प्रेरक गीतों की संगीतमय प्रस्तुति देकर छात्र-छात्राओं में पढ़ाई के प्रति नया उत्साह भर दिया, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।
सभा को संबोधित करते हुए एक्टिविस्ट 100 के संयोजक प्रोफेसर सोनू सरकार ने कहा कि शिक्षक दिवस सिर्फ औपचारिकता या सम्मान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के प्रति पूरे समाज के उत्तरदायित्व को रेखांकित करने का दिन है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा का मकसद केवल परीक्षा में अंक लाना या नौकरी पाना नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों को संवेदनशील, ईमानदार और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक बनाना भी जरूरी है। शिक्षक अपने संस्कारों और ज्ञान से पूरे राष्ट्र की दिशा तय करते हैं।
वहीं, मनोज सर ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु और शिष्य का नाता कक्षाओं की चारदीवारी से कहीं आगे का होता है। जीवन की हर चुनौती में शिक्षक का सही मार्गदर्शन छात्र को सही दिशा दिखाता है। अन्य वक्ताओं ने भी छात्रों से नियमित अध्ययन करने, लक्ष्यों के प्रति अडिग रहने और समाज के उत्थान में रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील की। समारोह के अंत में उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों ने एक-दूसरे के प्रति आभार प्रकट किया और शिक्षा की रोशनी को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प लिया।