जनगणना में बज्जिका को मिले स्वतंत्र पहचान, गृह मंत्री से की अलग कोड की मांग

  • Post By Admin on Jun 13 2026
जनगणना में बज्जिका को मिले स्वतंत्र पहचान, गृह मंत्री से की अलग कोड की मांग

मुजफ्फरपुर : बज्जिका भाषा को जनगणना प्रपत्र में अलग पहचान दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘बज्जिका प्रसार’ ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र भेजकर आगामी जनगणना में बज्जिका भाषा के लिए अलग कोड निर्धारित करने की मांग की है।

संस्था के संस्थापक अनिल कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि बिहार के मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, शिवहर, पूर्वी चंपारण, वैशाली तथा पश्चिमी दरभंगा सहित नेपाल के मधेशी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बज्जिका भाषा बोलते हैं। उनका दावा है कि बज्जिका भाषियों की संख्या चार करोड़ से अधिक है, इसलिए इस भाषा को जनगणना में स्वतंत्र पहचान मिलनी चाहिए।

पत्र में बज्जिका भाषा की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत का भी उल्लेख किया गया है। अनिल कुमार ने कहा कि बज्जिका का इतिहास प्राचीन बज्जिका जनपद से जुड़ा हुआ है और इस भाषा में साहित्य की लगभग सभी विधाओं में पर्याप्त रचनात्मक सामग्री उपलब्ध है। उन्होंने तर्क दिया कि जनगणना में अलग कोड मिलने से भाषा की वास्तविक जनसंख्या का आकलन संभव होगा तथा इसके संरक्षण और विकास को नई दिशा मिलेगी। संस्था की ओर से यह भी कहा गया कि बज्जिका भाषा भारत और नेपाल के मधेशी क्षेत्रों के लोगों के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम रही है। जनगणना में स्वतंत्र पहचान मिलने से भाषा के प्रचार-प्रसार, शैक्षणिक अध्ययन और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

इस मांग का समर्थन करने वालों में अनिल कुमार, सुबोध कुमार, सुधांशु कुमार, अनिल कुमार अनल, प्रकाश गुप्ता, शिवम और छाया सहित संस्था के अन्य सदस्य शामिल हैं। संस्था ने केंद्र सरकार से बज्जिका भाषियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सकारात्मक विचार करने की अपील की है।