गुरु-शिष्य परंपरा अनुदान निरस्त करने के फैसले पर कलाकारों में आक्रोश, दिल्ली में उठी आवाज
- Post By Admin on Apr 07 2026
पटना: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा (रिपर्टरी ग्रांट) के तहत दिए जाने वाले वेतन अनुदान को देशभर के हजारों संस्थानों के लिए निरस्त या बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ कलाकारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। इस निर्णय का असर बिहार के लगभग 90 सांस्कृतिक संस्थानों पर भी पड़ा है, जिससे राज्य के रंगकर्मियों और कलाकारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इस मुद्दे को लेकर देश के 18 राज्यों से करीब 250 कलाकार दिल्ली पहुंचे और एकजुट होकर अपना विरोध दर्ज कराया। वहीं, बिहार से भी लगभग 30 रंगकर्मी इस विरोध में शामिल हुए और अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। बिहार के कलाकारों ने इस संबंध में सांसद मनोज तिवारी और संस्कार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत गोखले को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कलाकारों ने इस फैसले को तुगलकी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की और कहा कि इससे देश की सांस्कृतिक धरोहर और परंपरागत कला पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। दिल्ली पहुंचे बिहार के कलाकारों में मनीष महिवाल, अमित रौशन, डॉ. शैलेंद्र, मिथिलेश सिंह, मो. जानी, सनद कुमार, गणेश गौरव, मो. जहांगीर खान, आजाद हुसैन, पप्पू ठाकुर, हरिशंकर रवि, अजीत चौहान, भारतेन्दु चौहान सहित अन्य रंगकर्मी शामिल रहे। इन सभी ने सामूहिक रूप से अपनी बात रखी और सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की।
मुलाकात के दौरान सांसद मनोज तिवारी और संस्कार भारती दिल्ली के अध्यक्ष अभिजीत गोखले ने कलाकारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि वे इस विषय को संस्कृति मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के समक्ष रखेंगे, ताकि कलाकारों के हितों की रक्षा हो सके। कलाकारों का कहना है कि गुरु-शिष्य परंपरा के तहत मिलने वाला यह अनुदान न केवल उनकी आजीविका का सहारा था, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी था। ऐसे में इसके बंद होने से कला जगत को गहरा नुकसान हो सकता है।