गांवों में सशक्त आजीविका की नई शुरुआत: लखीसराय में दो दिवसीय पंच सम्मेलन का आगाज
- Post By Admin on Aug 07 2026
लखीसराय : जिला परिषद सभागार में जिला पदाधिकारी श्री शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में "विकसित भारत के लिए 125 दिन ग्रामीण रोजगार की नई गारंटी" विषय पर आधारित दो दिवसीय पंच सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त श्री सुमित कुमार तथा NEP निदेशक श्री नीरज आनंद द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। समारोह के प्रारंभ में उपस्थित प्रतिनिधियों को नई ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था की बारीकियों से अवगत कराने के लिए एक वृत्तचित्र (वीडियो) प्रदर्शित किया गया, जिसके बाद इस विषय पर गहन परिचर्चा आयोजित की गई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी श्री शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि ग्रामीण भारत में आजीविका सुरक्षा प्रदान करने के लिए समय-समय पर कई नीतियां बनाई गईं। वर्ष 2005 में लागू राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ने ग्रामीण परिवारों को रोजगार का पहला कानूनी अधिकार दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले दो दशकों में मनरेगा ने न केवल रोजगार सृजन किया है, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी मजबूती दी है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौर में गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देकर इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बिखरने से बचाया।
जिला पदाधिकारी ने नई रोजगार गारंटी व्यवस्था के प्रमुख सुधारों पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था पुरानी योजनाओं का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि उनका एक उन्नत और व्यावहारिक सुधार है। इसमें गारंटीकृत रोजगार को 100 दिनों से बढ़ाकर अब 125 दिन कर दिया गया है। कृषि गतिविधियों के दौरान श्रमिकों की उपलब्धता बनी रहे और बुवाई व कटाई प्रभावित न हो, इसके लिए 60 दिनों का विशेष लीव पीरियड निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, अब राज्यों को संसाधनों का आवंटन उनकी वास्तविक स्थानीय आवश्यकताओं और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।
नई नीति के अंतर्गत विभिन्न विभागों—जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, आईसीडीएस, पंचायती राज और शिक्षा विभाग—के साथ मजबूत अभिसरण (Convergence) पर बल दिया गया है। इसके तहत गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा, जिसमें सरकारी विद्यालयों में चारदीवारी, पृथक शौचालय, रसोई शेड और अतिरिक्त कक्ष का निर्माण शामिल है। साथ ही ग्रामीण हाट-बाजार, पंचायत स्तर पर जल निकासी व्यवस्था, मुक्तिधाम, तालाबों व पोखरों का विकास, पौधारोपण, जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए इन विकास कार्यों की योजना प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल और GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) के माध्यम से तैयार की जाएगी।
जिला पदाधिकारी ने कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी मुखिया, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की कि इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त श्री सुमित कुमार, निदेशक NEP श्री नीरज आनंद, जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री यदुवंश राम, सभी माननीय जिला परिषद सदस्य तथा जिले के सभी मुखिया उपस्थित रहे।