ललिता सप्तमी 2025 : पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त – जानें कैसे करें व्रत
- Post By Admin on Aug 29 2025

नई दिल्ली : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ललिता सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन राधा रानी की प्रिय सखी ललिता देवी के जन्मोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है। इस साल सूर्य सिंह राशि में रहेंगे और चंद्रमा 7 बजकर 53 मिनट तक तुला राशि में रहकर इसके बाद वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे।
दृक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जबकि राहुकाल सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
ललिता सप्तमी का व्रत मुख्य रूप से मथुरा, वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन ललिता देवी की पूजा करने से राधा-कृष्ण प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि, प्रेम और सौभाग्य आता है। यह व्रत नवविवाहित जोड़ों और संतान की लंबी उम्र व स्वास्थ्य के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
व्रत विधि के अनुसार, ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान और नित्यकर्म के बाद पूजा स्थल को साफ करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर राधा-कृष्ण और देवी ललिता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। व्रत संकल्प के बाद लाल वस्त्र, फूल, श्रृंगार सामग्री और मिठाई अर्पित करें। तुलसी दल का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
पूजा में देवी ललिता की आरती और तीन बार परिक्रमा करने के बाद ‘ॐ ह्रीं ललितायै नमः’ मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। पूजा संपन्न करने के बाद प्रसाद ग्रहण कर आसन का प्रणाम करना चाहिए।