मंगल पांडे, नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी समेत अन्य बिहार CM बनने की रेस में लगे, किसपर खेलेगी BJP अपना दांव
- Post By Admin on Mar 04 2026
पटना: बिहार की राजनीति में होली से पहले बड़ा बदलाव होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। अगर ऐसा होता है तो पहली बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने की संभावना बन सकती है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए किस नेता पर दांव लगाया जाएगा।
नीतीश के राज्यसभा जाने की चर्चा से गरमाई सियासत
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के जरिए केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होने हैं और नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। जेडीयू की ओर से अभी तक उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए गए हैं, जिससे अटकलों को और बल मिला है। सूत्रों के अनुसार यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में एनडीए सरकार का नेतृत्व भाजपा के हाथ में जा सकता है।
सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे
मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख माना जा रहा है। वर्तमान में वे गृह विभाग संभाल रहे हैं और सरकार में नंबर दो की भूमिका में हैं। इससे पहले वे वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समुदाय से आते हैं, जो बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण ओबीसी वोटबैंक माना जाता है। कुशवाहा और कुर्मी समुदाय के समीकरण को ‘लव-कुश’ फार्मूला कहा जाता है, जिसे बिहार की राजनीति में काफी प्रभावशाली माना जाता है।
नित्यानंद राय भी रेस में
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताया जा रहा है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। नित्यानंद राय का लंबा राजनीतिक अनुभव है और वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। यादव समुदाय से आने के कारण उनका सामाजिक समीकरण भी भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
मंगल पांडेय का भी नाम चर्चा में
अगर भाजपा किसी सवर्ण चेहरे को आगे बढ़ाती है तो स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का नाम भी प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। वे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और संगठन तथा सरकार दोनों में लंबा अनुभव रखते हैं। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके मंगल पांडेय को केंद्रीय नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है।
नए चेहरे से चौंका सकती है भाजपा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका भी सकती है। हाल के वर्षों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और दिल्ली जैसे राज्यों में पार्टी ने ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया, जिनके नाम पहले चर्चा में नहीं थे। इसलिए बिहार में भी इसी तरह का ‘सरप्राइज फैक्टर’ देखने को मिल सकता है।
नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा क्यों तेज
दरअसल बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होना है। एनडीए ने अपने तीन उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जबकि जेडीयू के हिस्से की दो सीटों पर अब तक फैसला नहीं हुआ है। पहले चर्चा थी कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाकर राज्यसभा भेज सकते हैं, लेकिन अब चर्चा यह भी है कि खुद नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक इस स्थिति में भाजपा मुख्यमंत्री पद संभाल सकती है और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और अंतिम फैसला जेडीयू नेतृत्व को ही करना है।
बिहार की राजनीति में इन अटकलों के बीच अब सबकी नजर राज्यसभा चुनाव और जेडीयू की अगली घोषणा पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि राज्य की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।