BJP का मास्टरस्ट्रोक: बिहार में सोशल इंजीनियरिंग या सरप्राइज चेहरा-किसे मिलेगा मुख्यमंत्री पद
- Post By Admin on Mar 05 2026
पटना: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने के फैसले ने सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। इस फैसले के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं और राज्य की कमान भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जाती है, तो सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि भाजपा किस चेहरे पर भरोसा जताती है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा इस मौके को सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी यदि मुख्यमंत्री पद के लिए किसी पिछड़े वर्ग के नेता को आगे करती है, तो इसे राज्य की राजनीति में एक बड़े ‘सोशल इंजीनियरिंग’ कदम के रूप में देखा जाएगा। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों की अहम भूमिका को देखते हुए भाजपा इस दिशा में रणनीतिक फैसला ले सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ओबीसी या अन्य पिछड़ा वर्ग से आने वाले किसी मजबूत नेता को मुख्यमंत्री बनाकर राज्य में अपने जनाधार को और मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। इससे पार्टी को आगामी चुनावों में भी फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि भाजपा के पिछले फैसलों को देखें तो यह भी संभव है कि पार्टी किसी ऐसे चेहरे को आगे कर दे, जिसका नाम अभी तक मुख्यमंत्री की रेस में खुलकर सामने नहीं आया है। हाल के वर्षों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में भाजपा ने ऐसे ही अप्रत्याशित निर्णय लेकर सभी को चौंका दिया था। ऐसे में बिहार में भी पार्टी किसी नए या कम चर्चित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर राजनीतिक सरप्राइज दे सकती है। फिलहाल एनडीए और भाजपा के भीतर इस मुद्दे पर मंथन जारी है और सभी की नजरें आने वाले दिनों में होने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं। बिहार की राजनीति में यह फैसला आगे की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।