नौकरी नहीं, हुनर बना सहारा : मोपेड पर दुकान चलाकर कमा रहे रोजी-रोटी

  • Post By Admin on Mar 20 2026
नौकरी नहीं, हुनर बना सहारा : मोपेड पर दुकान चलाकर कमा रहे रोजी-रोटी

लखीसराय : जहां एक ओर युवाओं में सरकारी नौकरी की चाहत हावी है, वहीं उत्तर प्रदेश के कुछ युवाओं ने परंपरागत सोच को तोड़ते हुए स्वावलंबन की अनोखी मिसाल पेश की है। ये युवा अपनी मोपेड पर ताला-चाबी की ‘चलती-फिरती दुकान’ सजाकर बिहार के विभिन्न इलाकों में घर-घर जाकर सेवाएं दे रहे हैं।

लखीसराय की सड़कों पर इन दिनों एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिल रहा है, जहां टीवीएस XL100 मोपेड पर सवार दो युवक अपने साथ पांच लेदर ब्रीफकेस लेकर घूमते हैं। इन ब्रीफकेस में आधुनिक ताले, चाबियां बनाने के उपकरण और उनका हुनर मौजूद है। जरूरतमंद लोगों को वे मौके पर ही ताला-चाबी से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

इन युवाओं का कहना है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसे करने की सोच मायने रखती है। वे बिहार को अपनी कर्मभूमि बनाकर मेहनत के दम पर सम्मानजनक आजीविका कमा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में रोजगार के अवसरों की कमी नहीं है, लेकिन स्थानीय युवाओं में छोटे व्यवसायों को लेकर झिझक अब भी बनी हुई है। अधिकांश युवा या तो सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे रहते हैं या फिर बड़े शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं।

ऐसे में बाहर से आए इन युवाओं का प्रयास एक सकारात्मक संदेश देता है कि यदि हुनर और मेहनत का जज्बा हो, तो स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। ‘चलता-फिरता बाजार’ बनकर ये युवा न केवल अपनी जीविका चला रहे हैं, बल्कि समाज में व्याप्त श्रम के प्रति हीन भावना को भी चुनौती दे रहे हैं।