चंद्रमा के करीब पहुंचकर सुरक्षित लौटा आर्टेमिस-2, नासा ने रचा नया इतिहास

  • Post By Admin on Apr 11 2026
चंद्रमा के करीब पहुंचकर सुरक्षित लौटा आर्टेमिस-2, नासा ने रचा नया इतिहास

वाशिंगटन : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मानवयुक्त चंद्र मिशन ‘आर्टेमिस-2’ सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। मिशन में शामिल चारों अंतरिक्ष यात्री दस दिन की ऐतिहासिक यात्रा के बाद सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए। शनिवार सुबह अंतरिक्ष यान ने कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट के पास प्रशांत महासागर में सफल लैंडिंग की।

नासा के अनुसार इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने करीब 6 लाख 90 हजार मील से अधिक की दूरी तय की। मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के बेहद करीब तक पहुंचे और फिर वहां से पृथ्वी की ओर लौट आए। इस सफलता के बाद नासा अब अगले मिशन ‘आर्टेमिस-3’ की तैयारियों में जुट गया है, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है।

अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी पर नासा ने अंतरिक्ष यान की लैंडिंग का वीडियो साझा करते हुए दल का स्वागत किया। मिशन में कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल थे। बताया गया कि यह मिशन पहले फरवरी में निर्धारित था, लेकिन हाइड्रोजन ईंधन के रिसाव के कारण इसे टालना पड़ा। बाद में तकनीकी खामियों को दूर करने के बाद रॉकेट को दोबारा प्रक्षेपण स्थल पर लाया गया और मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। करीब 50 वर्ष बाद यह पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन रहा। साथ ही इसमें एक महिला, एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री और एक गैर-अमेरिकी सदस्य की भागीदारी ने इसे और विशेष बना दिया है। आर्टेमिस-2 ने फ्लोरिडा स्थित केनेडी अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी। इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण को देखने के लिए हजारों लोग वहां मौजूद थे। आसपास की सड़कें और समुद्र तट भी लोगों से खचाखच भरे रहे, जिससे 1960 और 1970 के दशक के अपोलो अभियानों की यादें ताजा हो गईं।

दस दिन की इस यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यान पहले पृथ्वी की कक्षा में रहा और उसके बाद मुख्य इंजन को सक्रिय कर चंद्रमा की दिशा में बढ़ा। कैप्सूल चंद्रमा के करीब से गुजरने के बाद करीब 6400 किलोमीटर आगे तक गया और फिर यू-टर्न लेकर प्रशांत महासागर में उतर गया। इस तरह यह दल अंतरिक्ष में अब तक सबसे दूर तक जाने वाले मानवों में शामिल हो गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ‘आर्टेमिस-1’ मिशन में कोई अंतरिक्ष यात्री सवार नहीं था। उसमें केवल जीवन रक्षक प्रणालियों और अन्य तकनीकी उपकरणों का परीक्षण किया गया था। ‘आर्टेमिस-2’ के साथ पहली बार इन प्रणालियों का मानव मिशन में उपयोग किया गया, जो चंद्रमा पर भविष्य में मानव की स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।