फार्मा सेक्टर में तकनीकी क्रांति, AI से बदलेगी दवा खोज की रफ्तार
- Post By Admin on Apr 14 2026
नई दिल्ली : दवाइयों की खोज और विकास के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आने वाले समय में निर्णायक भूमिका निभाने जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके उपयोग से सटीक उपचार वाली दवाओं का विकास संभव होगा और नवाचार आधारित स्वास्थ्य तंत्र को मजबूती मिलेगी। उन्होंने केवल मौजूदा प्रणालियों के डिजिटलीकरण के बजाय पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से परिभाषित करने पर जोर दिया।
यह विचार नौवें इंडिया फार्मा 2026 के पहले दिन आयोजित सत्रों में सामने आए, जहां नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नियामक और तकनीकी विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र हुए। उद्घाटन सत्र में नीतिगत उद्देश्यों और उनके जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
औषधि विभाग के सचिव मनोज जोशी ने अनुसंधान एवं विकास के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले मॉडल को बढ़ावा देने, सरकारी प्रयोगशाला नेटवर्क को मजबूत करने और नियामक ढांचे को यूरोपीय मानकों के अनुरूप बनाने की आवश्यकता बताई। वहीं, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव राजीव बहल ने कहा कि अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता में वृद्धि के बावजूद भारत को अपने स्वयं के अनुसंधान एवं विकास मॉडल की जरूरत है, जिससे नवाचारकर्ताओं में बाजार के प्रति विश्वास बढ़े और उद्योग तथा शिक्षा जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने अनुसंधान आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए उद्यम पूंजी निवेश और सह-वित्तपोषण तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही प्रारंभिक शोध को वैश्विक स्तर के समाधानों में बदलने के लिए एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।
दूसरे सत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप एक कुशल और पूर्वानुमानित नियामक ढांचा तैयार करने पर चर्चा हुई। भारत के औषधि नियंत्रक जनरल डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा कि प्रभावी नियामक प्रणाली के निर्माण में सभी हितधारकों के परामर्श की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
तीसरे सत्र में औषधि मूल्य श्रृंखला में AI की परिवर्तनकारी क्षमता पर विस्तार से चर्चा की गई, जबकि चौथे सत्र में वैश्विक अनुबंध अनुसंधान, विकास और विनिर्माण संगठन क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह क्षेत्र वर्तमान में लगभग 8 अरब डॉलर का है और 10 से 12 प्रतिशत की दर से तेजी से बढ़ रहा है, जो वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग को दर्शाता है।