गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संगीत की आत्मा, इसे जीवंत रखना हमारी जिम्मेदारी : प्रो. कनुप्रिया
- Post By Admin on Jul 29 2026
मुजफ्फरपुर : गुरु पूर्णिमा के अवसर पर लंगट सिंह कॉलेज के स्नातकोत्तर संगीत विभाग द्वारा बुधवार को "संगीत में गुरु-शिष्य परंपरा एवं शिक्षण" विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगीत की परंपराओं, गुरु के महत्व और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में गुरु-शिष्य संबंधों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया ने की। उन्होंने सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व गुरु की असीम करुणा, ज्ञान और मार्गदर्शन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि संगीत की दिव्य परंपरा में गुरु वह प्रकाश स्तंभ हैं, जिनके सान्निध्य में शिष्य अज्ञानता से ज्ञान की ओर अग्रसर होता है। प्रो. कनुप्रिया ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संगीत की आत्मा है। यह केवल ज्ञान के हस्तांतरण का माध्यम नहीं, बल्कि एक ऐसा पवित्र संबंध है जो शिष्य के व्यक्तित्व, संस्कार और कला साधना को आकार देता है। उन्होंने कहा कि तकनीक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के इस दौर में भी इस परंपरा की मूल भावना को संरक्षित रखते हुए उसे वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के साथ समन्वित करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के संगीतकार डॉ. राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि संगीत साधना में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु की कृपा और मार्गदर्शन के बिना शास्त्रीय संगीत की गहराइयों तक पहुंचना संभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को गुरुजनों के प्रति सम्मान और समर्पण की भावना बनाए रखने का संदेश दिया। संगोष्ठी के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में विभाग के विद्यार्थियों ने शास्त्रीय एवं सुगम संगीत की आकर्षक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में डॉ. रीमा कुमारी, डॉ. शशिकांत पाण्डेय, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. अंजना कुमारी, डॉ. आनंद कुमार सिंह, डॉ. सुधांशु सहित विभाग के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।