आरडीएस कॉलेज में संगोष्ठी, स्वतंत्रता संघर्ष से लोकतंत्र और नागरिक चेतना के विकास पर चर्चा
- Post By Admin on Aug 13 2026
मुजफ्फरपुर : रामदयालु सिंह महाविद्यालय के इतिहास विभाग एवं प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग के संयुक्त तत्वावधान में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘स्वतंत्रता संघर्ष और आज का भारत’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के विद्वान शिक्षक डॉ. शिवेश कुमार ने कहा कि परतंत्रता से स्वतंत्रता तक की भारत की यात्रा देश के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर उदारवादी, उग्रवादी और गांधीवादी चरणों में हुए संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न धाराओं के संयुक्त प्रयासों और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन को उस समय के युवाओं द्वारा संचालित ऐतिहासिक आंदोलन बताते हुए आज के युवाओं से अनुशासन और मर्यादा के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय इतिहास विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका प्रो. कहकशां ने स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं, युवाओं, किसानों और मजदूरों के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के भारत के सामने पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन, कुपोषण, अंधविश्वास, अशिक्षा, गरीबी और बेरोजगारी जैसी गंभीर चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने के लिए समाज को दीर्घकालिक संघर्ष करना होगा।
महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो. शशिभूषण कुमार ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता एक ओर महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्याग्रह और अहिंसक संघर्ष का परिणाम थी, वहीं भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और सुभाषचंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने छात्र-छात्राओं को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की सीख दी।
इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मो. निजामुद्दीन रज़वी ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संघर्ष केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने भारतीय जनता को प्रजा से नागरिक बनने की चेतना भी प्रदान की। उन्होंने कहा कि इसी संघर्ष ने भारतीय समाज को राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, मौलिक अधिकार, समान अवसर, स्वराज, वैज्ञानिक चेतना, स्वावलंबन और आर्थिक शोषण के विरुद्ध जागरूक किया।
कार्यक्रम में विषय प्रवेश डॉ. अनुपम कुमार ने कराया, जबकि स्वागत भाषण डॉ. मनीष कुमार शर्मा ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रबींद्र कुमार ने किया तथा मंच संचालन डॉ. अजमत अली ने किया।