बीआरएबीयू में ध्वनितत्त्व के साथ संस्कृत विभाग में मासिक व्याख्यान आयोजित

  • Post By Admin on Jul 30 2026
बीआरएबीयू में ध्वनितत्त्व के साथ संस्कृत विभाग में मासिक व्याख्यान आयोजित

मुजफ्फरपुर: बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में "संस्कृत व्याकरण एवं काव्यशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में ध्वनितत्त्व" विषय पर मासिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्कृत व्याकरण, काव्यशास्त्र और ध्वनि-सिद्धांत के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. श्यामबाबू शर्मा ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. श्रीप्रकाश पाण्डेय उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष कुमार झा ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. निभा शर्मा के विषय-प्रवर्तन से हुई। उन्होंने आचार्य आनन्दवर्धन के ध्वनि-सिद्धांत की मूल अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए ध्वनि को काव्य की आत्मा बताया। साथ ही ध्वन्यालोक में प्रतिपादित रसध्वनि, वस्तुध्वनि और अलंकारध्वनि की विशेषताओं का संक्षिप्त परिचय भी दिया।

मुख्य वक्ता प्रो. श्रीप्रकाश पाण्डेय ने अपने व्याख्यान में संस्कृत व्याकरण एवं काव्यशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में ध्वनितत्त्व का विस्तृत विश्लेषण किया। उन्होंने स्फोट एवं नाद के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करते हुए बताया कि व्याकरणशास्त्र में ध्वनि की अवधारणा काव्यशास्त्र में वर्णित ध्वनि से भिन्न है। उन्होंने ध्वनि, वर्ण, नाद और स्फोट के सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए भाषा की अभिव्यक्ति और अर्थबोध में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शब्द केवल अर्थ व्यक्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि ध्वनि के जरिए वह प्रत्यक्ष अर्थ से आगे बढ़कर भाव, रस और सौंदर्य का भी संप्रेषण करता है। व्याकरण में ध्वनि भाषा की आधारभूत इकाई है, जबकि काव्यशास्त्र में वही ध्वनि व्यंजना-शक्ति के माध्यम से काव्य की आत्मा बन जाती है। उन्होंने अनेक शास्त्रीय उदाहरणों के माध्यम से ध्वनितत्त्व की दार्शनिक पृष्ठभूमि और भारतीय काव्यशास्त्र में उसके महत्व को सरल भाषा में समझाया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. श्यामबाबू शर्मा ने ध्वनितत्त्व के अध्ययन की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों को गहन अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में लंगट सिंह महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉ. परमेश तिवारी, एमडीडीएम महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अर्चना तिवारी, आरबीबीएम महाविद्यालय के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. रामेश्वर राय, रामेश्वर सिंह महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. मीरा कुमारी सहित विभाग के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने शास्त्रीय दृष्टिकोण से विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. संगीता अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक व्याख्यान के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।