राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, CEO से लेकर कोषाध्यक्ष तक बदले गए
- Post By Admin on Sep 03 2026
अयोध्या : श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विवाद के पश्चात श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव किया गया है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की दो बैठकों में कई अहम फैसले लिए गए। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को तीन साल के कार्यकाल के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। वहीं, मौजूदा कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को पूर्णकालिक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी रहे हैं। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। 30 अप्रैल को वह पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। ऑपरेशन सिंदूर की योजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों में भी उनका नाम शामिल रहा है। इस अभियान में उनकी भूमिका के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा सम्मान से नवाजा गया था। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपालपुरा गांव से आने वाले जितेंद्र मिश्रा अब ट्रस्ट के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज की निगरानी करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में मंदिर की सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रबंधन और ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। उनकी नियुक्ति को ट्रस्ट के संचालन में पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका को ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह एम2के ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन हैं तथा अशोक सिंघल फाउंडेशन से भी जुड़े हैं। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल से उनके पारिवारिक संबंध भी बताए जाते हैं। नई जिम्मेदारी के तहत वह मंदिर निर्माण और प्रबंधन से संबंधित वित्तीय गतिविधियों के साथ दान एवं चंदे से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगे। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भागचंदका की नियुक्ति का स्वागत करते हुए उन्हें राम जन्मभूमि आंदोलन से लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ता के तौर पर बताया है।
ट्रस्ट में पूर्व उत्तर प्रदेश एडिशनल एडवोकेट जनरल मदन मोहन पांडेय को भी शामिल किया गया है। 74 वर्षीय पांडेय अयोध्या के रहने वाले हैं और राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में रामलला विराजमान तथा दिवंगत महंत रामचंद्र परमहंस दास की ओर से कानूनी पैरवी कर चुके हैं। वह 1990 के दशक के शुरुआती वर्षों से इस मामले से जुड़े रहे और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक कानूनी लड़ाई का हिस्सा रहे।
ट्रस्ट में डॉ. निर्मला यादव को भी नया सदस्य बनाया गया है। वह शिकोहाबाद के पीजी कॉलेज की पूर्व प्राचार्य हैं और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही हैं। वर्तमान में वह राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की उपाध्यक्ष हैं। उनकी नियुक्ति के बाद फिरोजाबाद और उनके मायके एटा के आवागढ़ में भी खुशी का माहौल देखा गया। उनके शामिल होने के साथ ही ट्रस्ट में पहली बार किसी महिला सदस्य की नियुक्ति हुई है।
ट्रस्ट में यह प्रशासनिक बदलाव मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितता के आरोपों के बीच हुआ है। 7 जून को समाजवादी पार्टी नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडेय ने मंदिर के चढ़ावे में करीब 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपए की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी गठित की। 25 जून को आठ नामजद आरोपियों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। अगले दिन आठों नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और जांच के दौरान उनके घरों से करीब 80 लाख रुपए बरामद होने की बात सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जुलाई में दूसरी एसआईटी का भी गठन किया गया, जिसकी अगुवाई एक आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई। पहली एसआईटी ने 17 अगस्त को अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज में गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया और भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में ट्रस्ट के भीतर पेशेवर वित्तीय प्रबंधन की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया गया। हालांकि, जांच में ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी के प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलने की बात कही गई।