भारत-अमेरिका ट्रेड टकराव : डोभाल का दो टूक – धमकियों से नहीं बदलेगा भारत का रुख

  • Post By Admin on Feb 05 2026
भारत-अमेरिका ट्रेड टकराव : डोभाल का दो टूक – धमकियों से नहीं बदलेगा भारत का रुख

नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जारी खींचतान के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का सख्त रुख सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल सितंबर में डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को दो टूक शब्दों में कहा था कि भारत किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा और जरूरत पड़ी तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने तक इंतजार करने को तैयार है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 18 प्रतिशत ट्रेड टैरिफ के पीछे भी भारत का यही अडिग रुख एक बड़ा कारण माना जा रहा है। डोभाल ने साफ कर दिया था कि भारत राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए अस्थायी रूप से रिश्तों में तल्खी क्यों न आए।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के बाद भारत-अमेरिका संबंधों को संतुलित करने के प्रयासों के तहत डोभाल को वॉशिंगटन भेजा गया था। इसी दौरान उनकी मुलाकात मार्को रूबियो से हुई, जहां उन्होंने अमेरिका को यह संदेश दिया कि भारत सार्वजनिक मंचों पर आलोचना से बचते हुए सम्मानजनक संवाद चाहता है, लेकिन दबाव की राजनीति स्वीकार नहीं करेगा।

इस मुलाकात के कुछ समय बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत दिखे। 16 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन पर फोन कर उनके काम की सराहना की थी। इसके बाद वर्ष के अंत तक दोनों नेताओं के बीच टैरिफ को लेकर चार बार बातचीत भी हुई। हालांकि, किसी औपचारिक समझौते की घोषणा सार्वजनिक रूप से नहीं की गई थी।

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर चीन को संतुलित करने और 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को देखते हुए। इसी कड़ी में दिसंबर में भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के आगमन को भी रिश्तों में सुधार का संकेत माना गया।

हालांकि, भारत ट्रंप प्रशासन के साथ रिश्तों में सतर्कता बरतने के पक्ष में है और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है। अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ मुलाकातें यह दिखाती हैं कि भारत के पास कूटनीतिक विकल्प खुले हैं।

इसी बीच भारत ने यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते कर यह भी साफ कर दिया है कि वह केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।