नड्डा से मुलाकात के बाद CJP का बड़ा संदेश - 'इस्तीफा ही आखिरी रास्ता'
- Post By Admin on Jul 24 2026
नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच शुक्रवार को CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक में संगठन ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, शिक्षा मंत्री को हटाने और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों सहित तीन प्रमुख मुद्दे सरकार के समक्ष रखे। सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अपना पक्ष रखने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है।
बैठक के बाद CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रंका ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन से जुड़े युवाओं को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया। उनका आरोप था कि जंतर-मंतर से लौट रहे युवाओं, प्रदर्शन स्थल की ओर जा रहे लोगों तथा प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन पहुंचाने वालों तक को हिरासत में लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वकीलों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे युवाओं और सरकार के बीच विश्वास का संकट गहरा सकता है।
सौरव दास ने कहा कि सरकार की शुरुआती प्रतिक्रिया यह थी कि ऐसी घटनाएं नहीं हो रही हैं। हालांकि बाद में सरकार ने आश्वासन दिया कि यदि इस प्रकार की कार्रवाई हो रही है तो उसे रोका जाएगा और दिल्ली पुलिस को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। बैठक में CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। संगठन के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि युवाओं की भावना स्पष्ट है और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कोई विकल्प स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सरकार ने अपना अंतिम जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है।
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। दूसरी, नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। तीसरी, आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं। CJP ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों और युवाओं का आंदोलन जारी है तथा सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।