क्या खत्म हुआ UPI का फ्री सफर? सरकार ने ₹2,000 की लिमिट तय कर बदला पूरा खेल
- Post By Admin on Sep 15 2026
नई दिल्ली : यूपीआई लेनदेन पर टैक्स या अतिरिक्त शुल्क को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा सोमवार देर रात जारी आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, ₹2,000 तक के यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
राजपत्र अधिसूचना और नए नियम का दायरा
पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के तहत मिले अधिकारों का प्रयोग करते हुए सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि बैंक या पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर ₹2,000 तक के भुगतान पर भेजने वाले अथवा प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं ले सकते। यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 तक का भुगतान यूपीआई के जरिए करता है, तो उससे अलग से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। यही व्यवस्था ₹2,000 तक के रूपे डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर भी प्रभावी रहेगी।
भ्रम दूर करने के लिए उठाया गया कदम
बीते कुछ दिनों से यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की संभावनाओं को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। आम उपभोक्ताओं में यह संशय था कि क्या हर डिजिटल भुगतान पर जेब ढीली करनी पड़ेगी। इसी भ्रम को समाप्त करने के लिए सरकार ने यह अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना यह सुनिश्चित करती है कि खुदरा और दैनिक उपभोग के छोटे लेनदेन पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहें।
₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर संभावित स्थिति
पहले सभी यूपीआई लेनदेन पूरी तरह मुफ्त थे, लेकिन नए आदेश में केवल ₹2,000 तक के लेनदेन को सुरक्षित दायरा दिया गया है। ₹2,000 से अधिक राशि वाले मर्चेंट लेनदेन पर कितना शुल्क लगाया जाएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वित्तीय जानकारों का अनुमान है कि बड़े ट्रांजैक्शन पर भविष्य में 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक का एमडीआर लागू किया जा सकता है। यह शुल्क कुछ चुनिंदा श्रेणियों और तय सीमा से अधिक के भुगतान पर ही सीमित रहेगा।
P2P बनाम मर्चेंट ट्रांजैक्शन की स्थिति
डिजिटल भुगतान प्रणाली में व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और मर्चेंट लेनदेन में स्पष्ट अंतर है। P2P लेनदेन वह है जब कोई व्यक्ति अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर करता है। वहीं मर्चेंट भुगतान किसी दुकानदार, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन स्टोर पर सामान और सेवाओं के बदले क्यूआर कोड स्कैन करके किया जाता है। सरकार ने अधिसूचना में मर्चेंट लेनदेन पर स्थिति साफ की है, जबकि सामान्य P2P ट्रांसफर को लेकर किसी अतिरिक्त चार्ज का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि किराने की दुकान, रेस्टोरेंट बिल या ₹2,000 तक के किसी भी नियमित डिजिटल भुगतान पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं कटेगा।