एमएसएमई पर सस्ते आयात की मार, रिपोर्ट में एंटी-डंपिंग नीति मजबूत करने की सिफारिश
- Post By Admin on May 26 2026
नई दिल्ली : बढ़ते सस्ते आयात और घरेलू उद्योगों पर उसके असर को लेकर जारी एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू होने से भारत हर वर्ष करीब 28,540 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। साथ ही घरेलू उद्योगों में लगभग 70,000 करोड़ रुपए तक नए निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह रिपोर्ट सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकॉनमी पॉलिसी रिसर्च और सेंटर फॉर डब्ल्यूटीओ स्टडीज द्वारा संयुक्त रूप से जारी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय से जारी सस्ते आयात के कारण घरेलू उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
अध्ययन के अनुसार यदि समय पर एंटी-डंपिंग उपाय लागू किए जाएं तो घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूती मिल सकती है और स्थानीय उद्योगों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से राहत मिल सकती है। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर दे रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि एंटी-डंपिंग ड्यूटी उन परिस्थितियों में लगाई जाती है, जब कोई विदेशी कंपनी किसी उत्पाद को अपने घरेलू बाजार से कम कीमत पर दूसरे देशों में बेचती है। सरकार इस उपाय का इस्तेमाल घरेलू उद्योगों को सस्ते और अनुचित आयात से बचाने के लिए करती है।
रिपोर्ट के मुताबिक हाल के वर्षों में कुछ अवधियों के दौरान एंटी-डंपिंग सिफारिशों को लागू नहीं किए जाने के कारण चीन से आयात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि घरेलू उत्पादन क्षमता उपलब्ध होने के बावजूद लगातार बढ़ते आयात से विदेशी मुद्रा भंडार और भारतीय उद्योगों की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एंटी-डंपिंग ड्यूटी के इस्तेमाल को लेकर भारत का रुख अन्य बड़े देशों की तुलना में अपेक्षाकृत संतुलित रहा है। अध्ययन के अनुसार भारत में ऐसी ड्यूटी की औसत अवधि 6.97 वर्ष है, जबकि वैश्विक औसत 11.19 वर्ष माना गया है।