रामेश्वर महाविद्यालय में तनाव प्रबंधन पर कार्यशाला, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवन-दृष्टि का संदेश
- Post By Admin on Oct 27 2026
मुजफ्फरपुर: पढ़ाई का दबाव, बदलती जीवनशैली और भविष्य की चिंता के बीच मानसिक शांति एवं आत्मिक संतुलन आज की बड़ी जरूरत बन गई है। इसी संदर्भ में विद्यार्थियों और शिक्षकों को तनाव प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रामेश्वर महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर में 27 अक्टूबर 2026 को तनाव प्रबंधन विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। महाविद्यालय के किशोरी सिन्हा सभागार में दर्शनशास्त्र विभाग, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) तथा सहजयोग संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में योग, ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच के माध्यम से मानसिक शांति प्राप्त करने के उपायों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. श्यामल किशोर ने की। उन्होंने पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना भी है। वर्तमान समय में मानसिक शांति, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच के लिए योग एवं ध्यान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को सहजयोग के महत्व से परिचित कराना तथा मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और सकारात्मक जीवन-दृष्टि के प्रति जागरूक करना है। कार्यशाला में सहजयोग के सैद्धांतिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए सहजयोग की नगर संयोजक गुंजन कुमारी ने इसकी अवधारणा, दार्शनिक आधार और मानव जीवन में उपयोगिता की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दर्शन मनुष्य को जीवन के गहन प्रश्नों पर विचार करने की प्रेरणा देता है, जबकि योग आत्मचिंतन और आंतरिक संतुलन की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।
वहीं, सहजयोग के व्यावहारिक पक्ष पर चर्चा करते हुए नगर संयोजक त्रिलोक कुमार ने मानसिक एकाग्रता, आत्मिक शांति और जीवन में सकारात्मकता विकसित करने में सहजयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सहजयोग के अभ्यास के माध्यम से स्वयं को समझने और आंतरिक संतुलन विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। नीतीश्वर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रमोद कुमार ने सहजयोग से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में सकारात्मक विचारों और आत्मचिंतन को महत्व देने की सलाह दी। कार्यक्रम का संचालन एवं स्वागत भाषण दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. रजनी रंजन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. महजबीन परवीन ने प्रस्तुत किया। कार्यशाला में महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।